Mohabbat Na Rahi Ab

कुछ कहने की कुछ सुनने की, हिम्मत न रही अब,
यूं हर किसी से सर खपाने की, हिम्मत न रही अब !
हम भी बदल गए हैं तो वो भी न रहे बिल्कुल वैसे,
सच तो ये है कि उनको भी, मेरी ज़रुरत न रही अब !
अब फ़ुरसत ही नहीं कि कभी उनको याद कर लें,
ख़ैर उनको भी हमारे जैसों से, #मोहब्बत न रही अब !
देखना था जो तमाशा सो देख लिया इस जमाने ने,
मैं तो भूल गया सब कुछ, कोई #नफ़रत न रही अब !
सोचता हूँ कि जी लूँ कुछ पल और #ज़िंदगी के बस ,
यूं भी वक़्त का मुंह चिढ़ाने की, फ़ितरत न रही अब !

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Maut Ka Saaman Dhoondta Hai

न बची जीने की चाहत तो मौत का सामान ढूंढता है,
क्या हुआ है दिल को कि कफ़न की दुकान ढूंढता है
समझाता हूँ बहुत कि जी ले आज के युग में भी थोड़ा
मगर वो है कि बस अपने अतीत के निशान ढूंढता है
मैं अब कहाँ से लाऊं वो निश्छल प्यार वो अटूट रिश्ते
बस वो है कि हर सख़्श में सत्य और ईमान ढूंढता है
दिखाई पड़ते हैं उसे दुनिया में न जाने कितने हीअपने
मगर वो तो हर किसी में अपने लिए सम्मान ढूंढता है
मूर्ख है "मिश्र" न समझा आज के रिश्तों की हक़ीक़त
अब रिश्तों से मुक्ति पाने को आदमी इल्ज़ाम ढूंढता है...

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Dard sunane nahi jata

मैं किसी के दर पर, सर झुकाने नहीं जाता !
मैं महफिलों में, अपना दर्द सुनाने नहीं जाता !
लेते हैं मज़े लोग औरों के बदहाल पर दोस्तो,
मैं किसी को, अपने ज़ख्म दिखाने नहीं जाता !

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Fursat nahi paas aane ki

फुर्सत नहीं किसी को भी हमारे पास आने की
बदल दी हैं सबने निगाहें लानत है ज़माने की
उसने भी आँखें फेर लीं जो दिल का अज़ीज़ था
न बची अब ख्वाहिशें किसी से दिल लगाने की
बहुत ज़हर पिया है इस नादान दिल ने दोस्तो
अब हिम्मत नहीं बची है ज़रा और भी पचाने की
अब आदत हो गयी है रहने की अंधेरों में दोस्त,
न जगती है कोई चाहत दिल में शमा जलाने की...

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Asar abhi baaki hai

चाहे दरकीं हैं दीवारें, मगर घर अभी बाक़ी है
हालात बदले हों भले ही, असर अभी बाक़ी है
दिल में कितने ही सवालात हों ख़िलाफ़त के,
मगर जैसा भी है, रहने को शहर अभी बाक़ी है
बड़ी ही शान थी इन दर ओ दीवार की कभी,
मिट गयी वो रंगत, मगर खंडहर अभी बाक़ी है
यहाँ बसती है मेरे अहसासों की दुनिया दोस्तो,
बस जी लूं कुछ और, इतना सबर अभी बाक़ी है

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