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Mohabaat haari nahi hogi

किसी भी मोड़ पर तुमसे वफ़ादारी नहीं होगी
हमें मालूम है तुमको ये बीमारी नहीं होगी...
तआल्लुक़ की सभी शमाएँ बुझा दीं इसलिए मैंने
तुम्हें मुझसे बिछड़ जाने में दुश्वारी नहीं होगी

मेरे भाई वहाँ पानी से रोज़ा खोलते होंगे
हटा लो सामने से मुझसे इफ़्तारी नहीं होगी
ज़माने से बचा लाए तो उसको मौत ने छीना
मोहब्बत इस तरह पहले कभी हारी नहीं होगी

 

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Kisko Dosh Du Yaaro

खुद अपने ही दीये ने, अपना घर जला दिया ,
समझा जिसे दिल, उसने ही दिल जला दिया !
तमन्नाओं का हुज़ूम लिए बैठे रहे उम्र भर,
इंतज़ार ए वक़्त ने, हमें बुझदिल बना दिया !
न जीना ही सीख पाए ठीक से न मरना ही,
हमने खुद को ही, खुद का क़ातिल बना दिया !
न चाहत सुकून की न फ़िक्र मौजों की यारो,
#ज़िन्दगी को बेकशी की, महफ़िल बना दिया !
किसको दोष दूं खुद को या तक़दीर को "यारो,
संभलते संभलते भी, अपना दामन जला दिया !!!

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Dil ko Zakham de gya

Ek Dil mere Dil ko zakham de gaya,
Zindagi bhar jeene ki kasam de gya
Lakho phoolo me se ek phool chuna tha humne,
Jo kaanto se gehri chubhan de gya.....

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Jhoothi Wafa Ka Kya Faida

अब झूठी वफ़ा जताने से, भला क्या फायदा,
#मोहब्बत के हलफ़नामे, से भला क्या फायदा !
कहोगे कि जकड़े थे ज़माने कि मज़बूरियों में,
अब तो किसी भी बहाने से, भला क्या फायदा !
ज़ख्मों में #दर्द है तो होने दो तुम्हें क्या ज़ालिम,
अब यूं दर्द की दवा देने से, भला क्या फायदा !
जल चुकी है अब तो दीये की बाती भी यारो,
अब उसमें तेल बढ़ा देने से, भला क्या फायदा !
वक़्त के साथ न चले तो कैसी #ज़िंदगी दोस्त ,
अब यूं व्यर्थ में हाथ मलने से, भला क्या फायदा !!!

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Zindagi Ka Afsos Na Karo

जब कभी बादल, मेरे आँगन पे गरजते हैं,
तब तब उनकी यादों के, साये लरजते हैं !
कैसे भुलाएं वो #मोहब्बत के हसीन लम्हें,
उनके सहारे तो, सुबह ओ शाम गुज़रते हैं !
वो तो पूंछते हैं #नफ़रत से हमारा रिश्ता,
हम हैं कि इसे उनका, अंदाज़ समझते हैं !
कोई कैसे भूल सकता है अपने वादे इरादे,
पर अफ़सोस, जुबां से लोग कैसे पलटते हैं !
यही #ज़िन्दगी है दोस्त अफ़सोस मत करिये,
इधर तो ऐसे ही, हर पल नज़ारे बदलते हैं !!!

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