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Sapne bunte reh gye

यारो हम तो सपने ही, बस बुनते रह गए ,
बस व्यर्थ की बातों में, सर धुनते रह गए !
लोग तो आसमाँ तक भी घूम आये मगर,
हम तो सिर्फ आसमाँ को, तकते रह गए !
#दोस्तों ने कर लीं पार जाने मंज़िलें कितनी,
मगर हम तो सिर्फ सोच में, घुलते रह गए !
#समंदर में उतर कर पा लिए लोगों ने रत्न,
और हम किनारे पे खड़े, हाथ मलते रह गए !
पस्त इस कदर हो गए हमारे हौसले दोस्तो,
कि ज़िन्दगी के खेल में, हम उलझते रह गए !!!

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Imaan Ko Kya Huya

अमृत बता कर लोगों को, वो ज़हर बेच सकता है ,
अपनी जागीर बता कर, वो समंदर बेच सकता है !
उसकी नसों में खून बहता है मक्कारियां बन कर,
वो अपना ही बता कर, औरों का घर बेच सकता है !
न जाने क्या हुआ है इंसान के ईमान को दोस्तो,
कि अपने नाम से किसी का, वो हुनर बेच सकता है !
ज़माने में कोई तो गिर चुका है इतना दोस्तो, कि
ज़रा से ऐश की खातिर, वो हमसफ़र बेच सकता है !
रोग ए हवस ने अब घेर रखा है आदमी को दोस्त ,
ज़रा से नफ़े के लिए, अपनों का सर बेच सकता है !

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Har Chehre Pe Muskan

हर एक चेहरे पर, मुस्कान मत खोजो,
किसी के नसीब का, अंजाम मत खोजो !
डूब चुका है जो गन्दगी के दलदल में,
रहने दो यारो, उसमें ईमान मत खोजो !
फंस गया है जो मज़बूरियों की क़ैद में,
उसके #दिल में दबे, अरमान मत खोजो !
जो पराया था आज अपना है तो अच्छा,
उसमें अब वो पुराने, इल्ज़ाम मत खोजो !
आदमी बस आदमी है इतना समझ लो,
हर किसी में अपना, #भगवान मत खोजो !
ये इंसान तो ऐबों का खज़ाना है दोस्तो,
उसके दिल से कोई, रहमान मत खोजो !!!

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Uski Saanson Mein Hoon

मैं तो बसता हूँ उनकी साँसों में मगर,
वो मंदिरों मस्जिदों में खोजते फिरते हैं !
मैं मिलता हूँ सिर्फ इंसानियत में मगर,
लोग हैं कि मज़हबों में खोजते फिरते हैं !
मैं तो एक था एक ही रहूँगा सदा मगर,
लोग तो मुझे टुकड़ों में खोजते फिरते हैं !
हर जगह हूँ मैं मगर देखता कोई नहीं,
मैं पास हूँ मगर वो दूर खोजते फिरते हैं !
न करते हैं याद मेरी वो अच्छे दिनों में,
जब आते हैं बुरे दिन तो खोजते फिरते हैं !
कर दिया भेंट हर पल नफरतों को दोस्तो,
अब बिखरे हुए रिश्तों को खोजते फिरते हैं !!!

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Gam Mein Bhi Muskurana

यारो ग़मों में भी मुस्कराना, बात छोटी नहीं !
गैरों को भी अपना बनाना, बात छोटी नहीं !
जब रास्ते की मुश्किलें बढ़ाने लगें फासले,
तो भी #मंज़िल पे पहुँच जाना, बात छोटी नहीं !
#ज़िंदगी की राह में मिलते हैं लोग कितने ही,
उनके दुखों में काम आना, बात छोटी नहीं !
दरिया ए जहान में घड़ियाल बहुत हैं दोस्त,
उनसे अपने को बचा पाना, बात छोटी नहीं !
जो रुसबाइयों के मंज़र में फंसे हैं रात दिन,
उनके चेहरों पे चमक लाना, बात छोटी नहीं !
जहां पर #नफरतों का ही बोलबाला हो,
वहां भी #मोहब्बतें निभा पाना, बात छोटी नहीं !

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