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Ishq se bandagi kar li

इश्क़ से हमने तो यारो, बंदगी कर ली,
यूं ही तबाह बेकार में, ज़िन्दगी कर ली !
हमें तो उजाले दौड़ते हैं काटने को अब,
हमने तो चरागों की, गुल रोशनी कर ली !
अपनों की #मोहब्बत ने धोखा दिया यारो,
इसलिए गैरों से हमने, आशिक़ी कर ली !
रखा है क्या हसीनों की महफ़िलों में दोस्त,
छोड़ कर सब को, तन्हा #ज़िन्दगी कर ली !!!

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Kitab E Ishq Meri

Kitab-E-Ishq Padh Rahe The.
Mera Bhi Naam Usme Juda Mila.
Maine apne Nam Ka Panna Khola.
Kismat Dekho Wahi Panna FATA Hua milla,
.
Kitab E ishq se beshaq tumhara panna fata tha,
Kyunki rabb ne wo panna nikal mujhe diya tha,
Kaha tha ki is nayab amanat ko sambhal tum rakhna,
Is anmol panne ko khud se kabhi na door karna,
Hai jiska naam isme wo jab bhi ye kitab payegi,
Panna fata dekh wo tumhe dhundhte aayegi,
Tumhare sache #Prem ka yhi inam hoga,
Jab is panne pe uske sath tumhara bhi naam hoga...

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Naye Rishton Mein Der

नए रिश्तों को पनपने में, देर तो लगती है,
यूं दुनिया को परखने में, देर तो लगती है !
नहीं बिकती #मोहब्बत बाज़ार में कहीं भी,
यारो दिलों में उतरने में, देर तो लगती है !
चाहे आजमाओ नुस्खा किसी हकीम का,
मगर ज़ख्मों के भरने में, देर तो लगती है !
ज़माने की ठोकरों से घायल पड़ा जो दिल,
उसके फिर से मचलने में, देर तो लगती है !
न घबराइये दोस्त देख कर बदला मौसम,
#इंसान को भी बदलने में, देर तो लगती है !!!

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Agar Apne Sath Ho

ये ज़िन्दगी सँवर जाये, अगर तो अपने पास हों,
शामो सहर बदल जाएँ, अगर तो अपने पास हों !
ठहरी हैं उदासियाँ जो आंखों में हमारी दोस्तो,
होगा खात्मा उनका भी, अगर तो अपने पास हों !
महकता है #गुलशन भी मौसम के हिसाब से ही,
वेवक़्त महकेगा वो भी, अगर तो अपने पास हों !
तन्हाइयों की ज़िन्दगी भी क्या ज़िन्दगी है यारो,
जमेंगी फिर से महफ़िलें, अगर तो अपने पास हो !
निरी उलझनों का सामान है ये ज़िन्दगी भी दोस्त ,
सुलझेगी हर उलझन भी, अगर तो अपने पास हों !!!

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Agar seh sako to chalo

गर राहों की मुश्किलों को, सह सको तो चलो,
गर तुम बेरुखी की धुंध में, रह सको तो चलो !
ये जमाना न बदला है न बदलेगा कभी भी,
गर उसके बिछाए काँटों से, बच सको तो चलो !
कोई न निकलने देगा अपने से आगे दोस्त,
गर गिरा के तुम किसी को, बढ़ सको तो चलो !
डूबा हुआ है सूरज अब शराफ़त का आजकल,
गर इस गर्दिश ए अंधेरां में, चल सको तो चलो !
बदल चुकी है हवाओं की तासीर भी अब तो,
गर खिलाफ इन हवाओं के, चल सको तो चलो !
ये अपने परायों का मसला छोड़ भी दो दोस्त ,
गर छोड़ कर अब शराफ़तें, चल सको तो चलो !!!

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