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Har Chehre Pe Mukhauta

आज तो दिल में, यादों का चमन सजा बैठा है,
अतीत का हर लम्हा, काबिले याद बना बैठा है !
वक़्त था कि रोज़ मिलते थे अपने यारों से हम,
अब तो कोई कहीं, तो कोई कहीं जमा बैठा है !
आये थे इस शहर में जोशो जवानी लेकर हम,
मगर अब कोई नाना, तो कोई दादा बना बैठा है !
आये थे आशाओं से भरा निश्छल दिल लेकर,
अब कोई अहम्, तो कोई वहम का मारा बैठा है !
हमने भी देखे थे कभी नज़ारे खुली आँखों से,
अब तो उन पर, ये बुढापे का चश्मा चढ़ा बैठा है !
क्या इसी को कहते हैं #ज़िंदगी जीना दोस्त कि,
जो था सहारा औरों का, अब लाचार बना बैठा है !
न पहचान पाओगे अपनों को भी अब,
अब हर कोई, अपने चेहरे पर मुखौटा लगा बैठा है !!!

Na Samajh Paye Hum

रह के भी साथ उनके, न समझ पाए हम,
दिल की कालिखों को, न परख पाए हम !
भला क्या करें हम उस से गिला शिकवा,
जिसको #दिल से अपना, न समझ पाए हम !
बड़ा गरूर था हमें अपनी परख पर यारो,
पर उसके दिल की इबारत, न पढ़ पाए हम !
कहने को तो दुनिया बड़ी हसीन है दोस्तो,
मगर जीने का करिश्मा, न समझ पाए हम !
#ज़िन्दगी फंसी है फरेबों में इस क़दर कि,
कोई निकलने का रस्ता, न समझ पाए हम !!!

Rishta Barbaad Kar Diya

तूने खुशुबुओं का रिश्ता, बर्बाद कर दिया,
इक हरे भरे से चमन को, उजाड़ कर दिया !
तेरी हर ख़ुशी में लटके थे जो हार बन कर,
मुस्कराते उन फूलों को, तूने कबाड़ कर दिया !
जो खुश थे तेरी बुलंदियों को देख कर दोस्त,
ख़ुदारा उन्हीं के #दिल पर, तूने वार कर दिया !
जिसका सहारा लेकर पहुंचा तू इतना ऊंचा,
उसी को धक्का मार कर, तूने बेराह कर दिया !
ये कैसा दस्तूर ओ ज़मीर है तेरा अय दोस्त,
कि खून के रिश्तों को, तूने लाचार कर दिया !!!

Ye Toofan Guzar Jaye

ये रात गुज़र जाए तो चले जाइएगा,
न रहे कोई अरमां तो चले जाइएगा !
बहुत बेचैन रहता है ये नादान दिल,
मैं समझा बुझा लूँ तो चले जाइएगा !
न जाने कितनी यादें बसी हैं दिल में,
उनको मैं भूल जाऊं तो चले जाइएगा !
मुद्दत के बाद तो आये हो तुम दोस्त,
ज़रा गुफ़्तगू कर लूँ तो चले जाइएगा !
ये कैसी है तड़प कैसी है हलचल दोस्त ,
ये तूफ़ान गुज़र जाए तो चले जाइएगा !

Yaad Dilane Chale Aate Hain

कैसे हैं ये मौसम, जो सताने चले आते हैं,
फिर से #याद उनकी, दिलाने चले आते हैं !
कभी इतराते हैं #मोहब्बत के हसीन लम्हें,
कभी नफरतों के पल, रुलाने चले आते हैं !
पहले देते हैं लोग ग़मों का ज़हर खुद ही,
और बाद इसके, शोक जताने चले आते हैं !
कैसी है ये दुनिया और कैसे हैं लोग इसके,
कि #दिल जलों के, दिल जलाने चले आते हैं !
अफ़सोस कि न देखता कोई भी घर अपना,
मगर औरों का घर, वो जलाने चले आते हैं !
सब जानते हैं "मिश्र" कि ज़रा सी है ज़िंदगी,
फिर भी आग इसमें, वो लगाने चले आते हैं !!!