Har Chehra Anjaan Sa
गुनाहों के शहर में, हर चेहरा अनजान सा दिखता है
इंसान की शक्लो सूरत में, इक शैतान सा दिखता है
मुखौटों से नहीं बदलती फितरत आदमी की,
हमें हर कदम उसका, बगुले के ईमान सा दिखता है...
गुनाहों के शहर में, हर चेहरा अनजान सा दिखता है
इंसान की शक्लो सूरत में, इक शैतान सा दिखता है
मुखौटों से नहीं बदलती फितरत आदमी की,
हमें हर कदम उसका, बगुले के ईमान सा दिखता है...
गले से ग़मों को न लगाएं तो क्या करें
यूं रात दिन आंसू न बहाएं तो क्या करें...
उन्हें अंधेरों से सख्त नफ़रत है दोस्तों,
अगर #दिल अपना न जलाएं तो क्या करें...
जुर्म किया है कि #मोहब्बत कर बैठे हम,
अगर उसे दिल से न निभाएं तो क्या करें...
हमें #गम नहीं कि वो #बेवफा हो गए,
अगर हम भी वफ़ा न निभाएं तो क्या करें...
गुज़र गया जो वक़्त, उसे फिर मुड़ते नहीं देखा
टूट गए जो #प्यार के रिश्ते, फिर जुड़ते नहीं देखा
फूलों को घेरे काँटों से तितली को कोई गिला नहीं,
पर उसको सूखे फूलों पर, कभी उडते नहीं देखा
गैरों ने जो घाव दिए शायद मिट जाएँ इक दिन,
पर अपनों ने जो ज़ख्म दिए, कभी भरते नहीं देखा
लोगों ने कितना वैभव पाया है इस दुनिया से,
पर ज्यादा पाने की तृष्णा को, कभी मरते नहीं देखा...