Shanti Swaroop Mishra

894
Total Status

Apno se dar lagta hai

हमें परायों से नहीं, अपनों से डर लगता है
हमें तो सच से नहीं, सपनों से डर लगता है
दिल में चाहत के तूफ़ान तो बहुत हैं मगर,
हमें तो बनावटी, मोहब्बतों से डर लगता है
हमने देखा है बहुत कुछ ज़िंदगी में यारो,
हमें शातिरों से नहीं, शरीफों से डर लगता है
जाने कितने किरदार देखे हैं उम्र भर हमने,
हमें चाशनी में पगी, बातों से डर लगता है
अब न दिखता है कोई मेल चेहरे का दिल से,
हमें दिल में उमड़ते, ज़हरों से डर लगता है
चाहत तो हमारी भी है सितारे छूने की मगर,
हमें आसमां से नहीं, खजूरों से डर लगता है
न समझ लेना ये कि हम तो कायर हैं "मिश्र",
हमें तो शेरों से नहीं, सियारों से डर लगता है

Teri Raah Takte Takte

तकते तकते राह तेरी, यारा शाम हो गयी
आँखों की रौशनी भी, अब तमाम हो गयी
न दिखी कोई मूरत हमें, दूर दूर तलक भी,
मुफ्त में अपनी मोहब्बत, बदनाम हो गयी
लोग हँसते रहे देख कर, यूं तड़पना हमारा,
पर ये ज़िन्दगी फिर भी, तेरे नाम हो गयी
अभी सताना है कितना, बस बता दे इतना,
अब तो ये जुबाँ भी हमारी, बेजुबान हो गयी
हम भी जानते थे कि, मोहब्बत खेल नहीं है,
न जाने कितनों की ज़िंदगी, क़ुर्बान हो गयी
यादों के पन्ने ही, बस पलटते रह गए,
पर उधर उल्फ़त की बगिया, वीरान हो गयी

Hum Aashiqui Samajh Baithe

वो मुस्कराये क्या, कि हम आशिक़ी समझ बैठे,
हम तो मौत के सामान को, ज़िन्दगी समझ बैठे

ये ख़ुदा का कुफ्र था, या फिर नादानियाँ हमारी,
कि धुप अंधेरों को यारो, हम चांदनी समझ बैठे

न समझ पाए हम, उसके अंदर भड़कते शोर को,
उसके राग खुन्नस को, हम रागिनी समझ बैठे

इसे हम वक़्त की मार कहें, या फिर बदनसीबी,
कि पत्थर की मूरत को, हम महजबीं समझ बैठे

वाह क्या ही अक्ल पायी है, परखने की हमने भी,
कि हलाहल की बूंदों को, हम चाशनी समझ बैठे

बड़ा ही शातिर बहुरूपिया, निकला वो तो "मिश्र",
कि उस कपटी मुखौटे को, हम सादगी समझ बैठे

Zindagi uljhanon ka shikar

हमने ज़िंदगी को, उलझनों का शिकार बना दिया
लोगों ने अपने कुसूर का भी; गुनहगार बना दिया

कभी ख़्वाहिश न थी कि किसी पे भार बन जाऊं,
मगर ज़िन्दगी की राहों ने, मुझे लाचार बना दिया

न समझ पाया मैं तो इस बेरहम दुनिया की बातें,
मुझे तो मतलब से भरे रिश्तों ने, बेज़ार बना दिया

अपनी इज़्ज़त को बचा के रखा था मैंने जाने कैसे,
पर मेरी तो हर चीज़ को यारों ने, बाजार बना दिया

होता है मुझे अफ़सोस देख कर ज़माने की ये चालें,
कभी तो थे हम सभी कुछ, अब ख़ाकसार बना दिया

सच है कि ज़िंदगी में थोड़ी सी खटपट तो लाज़िम है,
मगर लोगों ने छोटी ख़राश को भी, दरार बना दिया

वो भी इक जमाना था कि सभी साथ होते थे घर पर,
अब मिलन को भी अपनों ने, लंबा इंतज़ार बना दिया

हमने क़रीब से देखे हैं "मिश्र" इस दुनिया के रंग ढंग,
मगर कुछ ने तो इस जमाने को, शर्मसार बना दिया

Badi Ajeeb Hai Zindagi

यूं ही कभी तालियां, तो कभी गालियां मिलती रहेंगी
कहीं पर ग़म, तो कहीं पर शहनाइयां मिलती रहेंगी

बड़ी ही अजीब शय है, ये #ज़िन्दगी की राहें भी यारो,
यहाँ तो कभी दौड़, तो कभी बैसाखियाँ मिलती रहेंगी

आये हो इस दुनिया में, तो बस इतना समझ लो दोस्त,
यहाँ तो कभी भीड़, तो कभी तन्हाईयाँ मिलती रहेंगी

इस #मोहब्बत के नाम पर, कभी बेसब्र मत होना यारा,
यहाँ तो कभी दोस्ती, कभी दुशबारियाँ मिलती रहेंगी

यूं न खेलिए इधर खेल, सिर्फ जीत और जीत के वास्ते,
यहाँ तो कभी जीत, तो कभी नाकामियां मिलती रहेंगी

यारा न करना कभी यक़ीं, किसी को अपना समझ कर,
यहाँ तो कभी शराफत, कभी मक्कारियां मिलती रहेंगी

इस वक़्त की टेढ़ी चालों से, ज़रा संभल के रहना "मिश्र",
यहाँ तो कभी फांके, तो कभी खुशहालियाँ मिलती रहेंगी !!!