Waqt ganvaya mat kariye

बेकार अपने वक़्त को, गंवाया मत करिये
हर जगह अपनी टांग, फंसाया मत करिये
कोई भी किसी से कम नहीं है आज कल,
बेसबब किसी पे धौंस, जमाया मत करिये
ख़ुराफ़ातों से न मिला है न मिलेगा कुछ भी,
यूं हर वक़्त टेढ़ी चाल, दिखाया मत करिये
ये ज़िन्दगी है यारो इसे मोहब्बत से जीयो,
इसमें नफ़रतों का पानी, चढ़ाया मत करिये
गर उलझन है अपनों से तो सुलझाइये खुद,
मगर शोर घर से बाहर, मचाया मत करिये
अब तो न बचा है कोई भी भरोसे के लायक,
किसी को दिल की बात, बताया मत करिये
ज़िन्दगी का मसला कोई खेल नहीं है ‘मिश्र’,
कभी बेवजह इसको, उलझाया मत करिये...
 

Hamara Daur Aayega

कुछ देर की खामोशी है,
फिर #शोर आयेगा,,,
तुम्हारा सिर्फ़ वक्त आया है,
हमारा दौर आयेगा !!!

Rahte Hain Aaspaas

रहते हैं आसपास ही
लेकिन साथ नहीं होते,,,
कुछ लोग जलते हैं मुझसे
बस ख़ाक नहीं होते !!!

Marna Bhi Aa Gya

जीना भी आ गया, हमें मरना भी आ गया.
लोगों की नज़र को, हमें पढ़ना भी आ गया .
यूं ही तो नहीं गुज़ारी है ये ज़िन्दगी हमने,
दिलों की धड़कनें, हमें परखना भी आ गया !

मुखौटों की आड़ में बहुत लुट चुके हैं हम,
भोली सूरतों को, हमें समझना भी आ गया !
हँसते थे हम भी औरों की मुश्किलें देख कर ,
मगर अब तो खुद पे, हमें हँसना भी आ गया !

सर झुकाये रहे तो लोग ठगते रहे जी भर के,
अब तो सर उठा के, हमें चलना भी आ गया !
बड़ी ही टेढ़ी चाल है ज़ालिम ज़माने की "मिश्र",
पर कदम पर कदम, हमें रखना भी आ गया !

Meri aadat nahi hai

किसी से बहस करना, मेरी आदत नहीं है
बेकार उलझते फिरना, मेरी आदत नहीं है
यहाँ कैसे जी रहा हूँ कोई मेरे दिल से पूंछे,
मेरी ज़िन्दगी है यारो, कोई सियासत नहीं है
अगर सीधी भी हों राहें तो भी क्या फायदा,
न मिलेगी मंज़िल,गर दिल में ताकत नहीं है
मैं भी चाहता हूँ मोहब्बत की ज़िन्दगी यारो,
मेरी तो यूं भी किसी से, कोई अदावत नहीं है
ज़रा बच के रहना रहनुमाओं के मुखौटों से,
खुदा खैर करे यहां, कुछ भी सलामत नहीं है
बदल चुकी हैं अपने वतन की फ़िज़ाएं यारो,
यहाँ सच कहने की अब तो, इज़ाज़त नहीं है
इस ज़रा सी ज़िंदगी में बवाल कितने हैं,
यहाँ तो मरने के बाद भी, अब मोहलत नहीं है...