Zindagi Dekhni Hai To

मत समझो पत्थरों की दुनिया को सब कुछ,
गर तुमको देखनी है ज़िंदगी, तो गाँव चलिए !

मिटा डाला है जो क़ुदरत का सामान तुमने,
गर तुमको देखना है फिर से, तो गाँव चलिए !

तुम्हें कैसे रास आती हैं ये शहर की हवाएं,
गर सांस लेना है तुम्हें चैन की, तो गाँव चलिए !

क्यों घुमते फिरते हो तुम न जाने कहाँ कहाँ,
है देखना कुदरत का खज़ाना, तो गाँव चलिए !

न जानता है कोई इधर कि कोंन है पड़ोस में,
अगर देखने हैं दिलों के रिश्ते, तो गाँव चलिए !

सूरज की रौशनी भी न देख पाते कुछ लोग तो,
गर देखना है ऊषा का आँचल, तो गाँव चलिए !

यूं किस तरह से जीते हो इस शोरगुल में यारो,
गर सुननी है कूक कोकिल की, तो गाँव चलिए !

मिटा डाली है गरिमा ही तुमने हर त्यौहार की
गर तुमको देखने हैं ढंग असली, तो गाँव चलिए !

सोने चांदी से पेट भरता नहीं किसी का भी "मिश्र",
गर तुमको देखना है अन्नदाता, तो गाँव चलिए !

Dunia se bewafai ki to

Darte hain apse bewafai karne se,
Koi mujse kabhi insaf na krega...
Is dunia se #Bewafai ki to chlega
Lekin Apse kabhi ki to ,
Khuda bhi mujhe maaf na krega...

Tera Vaade Pe Aitbaar

गज़ब किया जो तेरे वादे पे एतबार किया,
तमाम रात हमने क़यामत का इंतज़ार किया...
न पूछ #दिल की हक़ीक़त मगर यह कहतें है,
वो बेक़रार रहे जिसने बेक़रार किया...

Bhool Ke Tumko

भूलकर हमें अगर तुम रहते हो सलामत,
तो भूल के तुम को संभलना हमें भी आता है...
मेरी फ़ितरत में ये आदत नहीं है वरना,
तेरी तरह बदल जाना मुझे भी आता है !!!

Dil Pathar Na Ho Jaye

कहीं ज़िंदगी हमारी, बदतर न हो जाए
कहीं ये दिल हमारा, पत्थर न हो जाये
उगाते रहिये फसलें ग़म या ख़ुशी की,
कहीं ये दिल की जमीं, बंजर न हो जाये
न होइए गुम इस गुलशन की फिज़ा में,
यारा कहीं कोई गुल ही, खंज़र न हो जाए
ज़रा सा काबू में रखिये अपने दिल को,
कहीं ज़िन्दगी का ढांचा, जर्जर न हो जाये
इस खामोश हवा से भी ज़रा यारी रखिये ,
कहीं बदल के तासीर, बवण्डर न हो जाए
समेट के रखिये ग़मों के दरिया को ,
कहीं किनारे तोड़ कर, समन्दर न हो जाए...