Achhe Din Bhi Aayenge

आते हैं आज मंहगे, कल सस्ते भी आएंगे
कभी चल कर तेरे क़रीब, रस्ते भी आएंगे
न हो ग़मज़दा इन पतझड़ों से अय बागवाँ,
बची हैं गर शाखें, तो फिर से पत्ते भी आएंगे
समय का चक्र तो घूमेगा अपने हिसाब से,
आये हैं बुरे दिन, तो कभी अच्छे भी आएंगे
न हो #उदास देख कर वीरानगी गुलशन की,
परिंदे बनाने नीड़ अपना, फिर से भी आएंगे
न छोड़िये विटप की परवरिश का सिलसिला,
आज आये हैं फल खट्टे, कल मीठे भी आएंगे
#ज़िन्दगी के इस मेले में आएंगे लोग कैसे कैसे,
गर आएंगे कभी शातिर, तो फ़रिश्ते भी आएंगे

Aajkal Ke Rishte

पहाडीयों की तरह #खामोश हैं,
आज के संबंध और #रिश्ते;
जब तक हम न पुकारें,
उधर से #आवाज ही नहीं आती !!!

Nafrat Thi Dil Mein

नफ़रत थी दिल में, तो इज़हारे प्यार क्यों कर बैठे,
#मोहब्बत के नाम पर, ज़िंदगी निसार क्यों कर बैठे !
जब छोड़ के ही भागना था बीच रस्ते से अय दोस्त,
तो फिर चलने का साथ मेरे, इक़रार क्यों कर बैठे !
जिधर देखो उधर दुश्मन ही तो दुश्मन हैं जहान में,
फिर बेताबियाँ के चलते, खुद पर वार क्यों कर बैठे !
जब पता ही था कि मंज़िलें आसान नहीं हुआ करतीं,
फिर दरम्याने सफर, दिल को बेक़रार क्यों कर बैठे !
चाहतों के मसले पे दिल को संभाल कर रखिये "मिश्र",
अरे आसमां की चाहत में, सितारों से रार क्यों कर बैठे !

Uski Ada Tang Karegi

Udas Na Baitho #Fiza Tang Karegi,
Guzre Huye Lamhon Ki Saza Tang Karegi...
Kisi Ko Na Layo #Dil Ke Itna Qareeb,
Kyun Ki Uske Jane Ke Baad Uski Ada Tang Karegi !!!

Sholon ko mat kurediye

जो दब चुके हैं राख में, उन शोलों को मत कुरेदिए !
जो भर चुके हैं जैसे तैसे, उन घावों को मत कुरेदिए !

बदल देते हैं खेल सारा वो अतीत के नापाक मंजर,
अब गुज़र चुके जो पीछे, उन लम्हों को मत कुरेदिए !

अतीत के गुलशन से बस चुनिए तो फूल खुशियों के,
भाई आये हो छोड़ पाछे, उन ख़ारों को मत कुरेदिए !

इन लफ़्ज़ों की मार से मैंने देखे है कितने ही घायल,
अरे जो बसा रखे है दिल में, उन भावों को मत कुरेदिए !

यहां पे हर किसी को हक़ है अपनी ज़िन्दगी जीने का,
फिर मज़हब के नाम पे, उनके मनों को मत कुरेदिए !

ये जमाना तो सब्र कर लेता है हर तरह से ही "मिश्र",
यूं सियासत के नाम पे, उसके जज़्बों को मत कुरेदिए !