Teri Raah Takte Takte

तकते तकते राह तेरी, यारा शाम हो गयी
आँखों की रौशनी भी, अब तमाम हो गयी
न दिखी कोई मूरत हमें, दूर दूर तलक भी,
मुफ्त में अपनी मोहब्बत, बदनाम हो गयी
लोग हँसते रहे देख कर, यूं तड़पना हमारा,
पर ये ज़िन्दगी फिर भी, तेरे नाम हो गयी
अभी सताना है कितना, बस बता दे इतना,
अब तो ये जुबाँ भी हमारी, बेजुबान हो गयी
हम भी जानते थे कि, मोहब्बत खेल नहीं है,
न जाने कितनों की ज़िंदगी, क़ुर्बान हो गयी
यादों के पन्ने ही, बस पलटते रह गए,
पर उधर उल्फ़त की बगिया, वीरान हो गयी

Zindagi uljhanon ka shikar

हमने ज़िंदगी को, उलझनों का शिकार बना दिया
लोगों ने अपने कुसूर का भी; गुनहगार बना दिया

कभी ख़्वाहिश न थी कि किसी पे भार बन जाऊं,
मगर ज़िन्दगी की राहों ने, मुझे लाचार बना दिया

न समझ पाया मैं तो इस बेरहम दुनिया की बातें,
मुझे तो मतलब से भरे रिश्तों ने, बेज़ार बना दिया

अपनी इज़्ज़त को बचा के रखा था मैंने जाने कैसे,
पर मेरी तो हर चीज़ को यारों ने, बाजार बना दिया

होता है मुझे अफ़सोस देख कर ज़माने की ये चालें,
कभी तो थे हम सभी कुछ, अब ख़ाकसार बना दिया

सच है कि ज़िंदगी में थोड़ी सी खटपट तो लाज़िम है,
मगर लोगों ने छोटी ख़राश को भी, दरार बना दिया

वो भी इक जमाना था कि सभी साथ होते थे घर पर,
अब मिलन को भी अपनों ने, लंबा इंतज़ार बना दिया

हमने क़रीब से देखे हैं "मिश्र" इस दुनिया के रंग ढंग,
मगर कुछ ने तो इस जमाने को, शर्मसार बना दिया

Zindagi Saza Kyun Hai

हवा में अनजान सा डर, बसा क्यों है,
हर लम्हा ज़िन्दगी का, खफा क्यों है !
गुज़रती हैं स्याह रातें करवटें बदलते,
ये ज़िन्दगी भी यारो, इक सज़ा क्यों है !
घर में छायी हैं बला की खामोशियाँ,
दर ओ दीवार पर मातम, सजा क्यों है !
दिल के कोनों में बढ़ गयी है हलचल,
बीती यादों का ये वबंडर, उठा क्यों है !
जब चाह थी जीने की न जी सके "मिश्र",
फिर से हसरतों का मेला, लगा क्यों है !

Ishq Homeopathy Hai

मिजाज़ ए #इश्क़
होम्योपैथिक है उनका,
ना सुइयाँ, ना बोतल,
ना एक्सरे, ना दाखिला,
हम दर्द बयाँ करते रहे और
वो मीठी गोलियाँ देते रहे !!!

Waqt Ek Jaisa Nahi

कल शीशा था सब देख-देख कर जाते थे,
आज टूट गया तो सब बच-बच कर जाते हैं!
ये वक़्त है साहब, कभी किसी का एक जैसा नहीं रहता