Insan jab tak fitrat nahi badal deta
इंसान घर बदल देता है मुकाम बदल देता है
रिश्ते बदल देता है दोस्त भी बदल देता है
उसको खुशी नसीब नहीं होगी
जब तक वह अपनी फितरत नहीं बदल देता है
इंसान घर बदल देता है मुकाम बदल देता है
रिश्ते बदल देता है दोस्त भी बदल देता है
उसको खुशी नसीब नहीं होगी
जब तक वह अपनी फितरत नहीं बदल देता है
बाधा तो एक चुनौती है, स्वीकारो, डरने का कोई काम नहीं
बार बार प्रयास करो, सफल बनो, रुकने का कोई काम नहीं
उत्साह भरो उस चींटी जैसा, जो गिर गिर कर चढ़ती रहती है
आखिर बाधाओं को पीछे छोड़, मंज़िल पर पहुंच कर रहती है
वो औरत है जिसने हमको, दुनिया में लाने का काम किया
वो औरत ही है जिसने हमको, भाई होने का सौभाग्य दिया
भूखे पेट सो गयी माता, पर हमको तो भर पेट खिलाया
रात रात भर जागी मां, पर लोरी गा गा कर हमें सुलाया
इस पूज्यनीय औरत ने ही, सम्पूर्ण सृष्टि का सृजन किया
वो ना होती तो कुछ ना होता, इस दुनिया पर अहसान किया
ये औरत ही किसी की भगिनी है,औरत ही किसी की पत्नी है
ये औरत ही मां की ममता है, ये औरत ही किसी की बेटी है
ममता की मूरत इस नारी ने, हमको जीवन का संदेश दिया
नफ़रत, गुलामी,जुल्मो सितम, ना सहने का अनुदेश दिया
कुछ पापी, दुष्ट, दुराचारी, इसकी महिमा को भूल गए
उसके सम्मान को तार तार कर, अपनी मर्यादा भूल गए
किसी ने इसकी अस्मत लूटी,किसी ने जला कर मार दिया
कुछ पापी मां बापों ने, इसे बस्तु समझकर बेच दिया
इस उपकार के बदले में ,औरत को तो कुछ भी न मिला
भूखे रहना, खून पिलाना, इस ममता को कैसा सिला मिला
मैं तो बस एक बुत हूँ जिसमें कोई भी अहसास नहीं
कितने तूफ़ां गुज़र गये मुझे इसका भी आभास नहीं
कितनों ने मुझ पर कूड़ा फैंका कितनों ने आघात किये
फिर भी में खामोश खड़ा सब देख रहा संताप लिये
कितनों ने मुझको प्यार दिया कितनो ने नफरत से देखा
सब भूल गया, कुछ याद नहीं, कुछ रखा नहीं मैने लेखा :(