ऐ #दोस्त मुझे कभी तो याद किया होता
किसी के हाथों कभी तो #पैगाम दिया होता
तेरे बिना ज़िंदगी कितनी अधूरी है हमारी,
कभी हमारे हालात का तो पता किया होता
बेशक तुम्हारी नज़रों में गुनहगार हम भी हैं,
तुमने ना सही हमने तो ख़याल किया होता
पर #दोस्ती में बदले की कोई जगह नहीं दोस्त,
दोस्ती का ये फ़लसफ़ा तो याद किया होता...

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