बदले नहीं हैं हम, यूं ही उलझे हुए से हैं ,
ज़माने की चाल में, कुछ अटके हुए से हैं !
न समझो कि न रहे हम पहले की तरह,
बस #खुशियों की चाह में, भटके हुए से हैं !
कभी थे दिन वो भी कि थी मस्ती ही मस्ती,
अब तो ग़मों की आग से, झुलसे हुए से हैं !
गुज़रा जमाना तो ख़यालो #ख़्वाब बन गया,
अब तो खुद के बुने जाल में, फंसे हुए से हैं !
ये #ज़िन्दगी भी कितने रंग बदलती है दोस्त,
लगता है कि भीड़ में, हम बिछड़े हुए से हैं !!!
कभी नफरतों में तुम, प्यार ढूंढो तो बात बने ,
कभी खामोशियों का, राज़ ढूंढो तो बात बने !
जो न कहता है दर्द अपने ज़माने में किसी से,
कभी तो उसके भी, अज़ाब ढूंढो तो बात बने !
इस #ज़िंदगी के सफर में मिलते हैं लाचार भी,
कभी उनके भी तुम, हालात ढूंढो तो बात बने !
क्यों कर ढूंढते हैं हम कमियां ही हर किसी में,
कभी तो अच्छाई भी, एकाध ढूंढो तो बात बने !
घुटता है बहुत कुछ इंसान के दिल में भी दोस्त,
कभी उसके भी तुम, ज़ज़्बात ढूंढो तो बात बने !
बाल कटाकर सब अपनी पहचान बेचने चले !
गुरु ने जो दिए थे सब निशान बेचने चले !
बेटे को अल्कोहल खा गई
ऊपर से कैंसर पिता को पहले थी
जमीन बेची अब मकान बेचने चले !
लूट लेते हैं भोले किसान को मंडियों में
व्यापारी कम दाम पड़ता
फिर भी फसल किसान बेचने चले !
क्या महिला बनाना यारा तूने
सच को लगाकर फांसी लूटो की तरफ
देख लेना जब तुम ब्यान बेचने चले !
कहीं धंधा जिस्म फरोशी का
कहीं है बिक्री लड़कियों की तौबा मेरे मालका
इंसानों को इंसान बेचने चले !
हम पत्थरों को पूजने वाले
उस राम को कैसे पाएंगे
अपना व्यापार करने के लिए
लकड़ी का भगवान बेचने चले !!!
शादी के बाद पत्नी कैसे बदलती है , जरा गौर कीजिए :
😛
पहले साल : मैंने कहा जी खाना खा लीजिए , आपने काफी देर से कुछ खाया नहीं ।
😛
दूसरे साल : जी खाना तैयार है , लगा दूं ?
😛
तीसरे साल : खाना बन चुका है , जब खाना हो तब बता देना ।
😛
चौथे साल : खाना बनाकर रख दिया है , मैं बाजार जा रही हूं , खुद ही निकाल कर खा लेना ।
😛
पांचवे साल : मैं कहती हूं आज मुझ से खाना नहीं बनेगा , होटल से ले आओ ।
😛
छठे साल : जब देखो खाना , खाना और खाना , अभी सुबह ही तो खाया था ।
😛
शादी के बाद पति कैसे बदलते है , जरा गौर कीजिए
😛
पहले साल : dear संभलकर उधर गड्ढा हैं
😛
दूसरे साल : अरे यार देख के उधर गड्ढा हैं
😛
तीसरे साल : दिखता नहीं उधर गड्ढा हैं
😛
चोथे साल : अंधी हैं क्या गड्ढा नहीं दिखता
😛
पांचवे साल : अरे उधर -किधर मरने जा रही हैं गड्ढा तो इधर हैं ..
मुस्कुराते रहिये…😛😀😛
हंसना ही जिन्दगी है। वरना शांत तो मुर्दे रहते हैं।