एक शराबी झूमता हुआ घर की ओर जा रहा था
कि अचानक रुक गया।
उसके पीछे दो लड़कियाँ किसी बात पर
आपस में झगड़ते हुए चल रही थीं।
एक लड़की: भगवान करे तेरी शादी इस शराबी से हो जाए।
दूसरी लड़की: नहीं भगवान करे तेरी हो जाए।
शराबी: मैं रूकूं या जाऊं ?
मैं तो बसता हूँ उनकी साँसों में मगर,
वो मंदिरों मस्जिदों में खोजते फिरते हैं !
मैं मिलता हूँ सिर्फ इंसानियत में मगर,
लोग हैं कि मज़हबों में खोजते फिरते हैं !
मैं तो एक था एक ही रहूँगा सदा मगर,
लोग तो मुझे टुकड़ों में खोजते फिरते हैं !
हर जगह हूँ मैं मगर देखता कोई नहीं,
मैं पास हूँ मगर वो दूर खोजते फिरते हैं !
न करते हैं याद मेरी वो अच्छे दिनों में,
जब आते हैं बुरे दिन तो खोजते फिरते हैं !
कर दिया भेंट हर पल नफरतों को दोस्तो,
अब बिखरे हुए रिश्तों को खोजते फिरते हैं !!!
एक बार एक चीते और गधे में बहस हो गई।
चीता बोला आसमान का रंग नीला
और गधा बोला काला।
दोनों राजा शेर के दरबार में पहुँचे।
शेर ने बहस सुन कर चीते को जेल में डालने का हुक्म दिया।
चीता गिड़गिड़ाया कि मैं सही हूँ
और मुझे ही सज़ा क्यों मिल रही है?
शेर बोला कि मैं जानता हूँ कि तुम सही हो
पर तुम्हें सज़ा इसलिए मिल रही है कि
तुमने गधे से बहस ही क्यों की!!!!
वो तो गधा है कुछ भी बोल सकता है ,
यारो ग़मों में भी मुस्कराना, बात छोटी नहीं !
गैरों को भी अपना बनाना, बात छोटी नहीं !
जब रास्ते की मुश्किलें बढ़ाने लगें फासले,
तो भी #मंज़िल पे पहुँच जाना, बात छोटी नहीं ! #ज़िंदगी की राह में मिलते हैं लोग कितने ही,
उनके दुखों में काम आना, बात छोटी नहीं !
दरिया ए जहान में घड़ियाल बहुत हैं दोस्त,
उनसे अपने को बचा पाना, बात छोटी नहीं !
जो रुसबाइयों के मंज़र में फंसे हैं रात दिन,
उनके चेहरों पे चमक लाना, बात छोटी नहीं !
जहां पर #नफरतों का ही बोलबाला हो,
वहां भी #मोहब्बतें निभा पाना, बात छोटी नहीं !