अंग्रेजी के प्रोफेसर से एक स्टूडेंट ने पूछा
कि सर नटुरे का अर्थ क्या होगा?
प्रोफेसर साहब हैरान!
टालने के लिए कह दिया कि कल बता दूँगा।
उन्होंने पूरी डिक्शनरी छान मारी,
किन्तु उन्हें नटुरे शब्द नहीं मिला।
अगले दिन स्टूडेंट ने फिर से पूछा
कि सर नटुरे का मतलब क्या होता है?
उस दिन भी उन्होंने बात टाल दी।
अब तो वह रोज़ पूछने लगा।
प्रोफेसर साहब उससे इतना घबराने लगे
कि उस लड़के को देखते ही रास्ता बदल देते,
किन्तु वह रोज़ आकर उनको टेँशन देकर चला जाता।
अंत में झुँझला कर उन्होने उस लड़के से कहा कि
मुझे नटुरे की स्पेलिंग बताओ।
लड़के ने कहा :- NATURE
अब तो प्रोफसर साहब का ख़ून खौल गया।
उन्होंने उस लड़के से कहा कि
मुझे बेवकूफ बनाते हो,
नेचर को नटुरे कह कह कर
तुमने मेरा जीना मुश्किल कर दिया था।
मैं तुम्हे कॉलेज से निकलवा दूँगा।
लड़के ने झट से प्रोफेसर साहब के
पैर पकड़ लिये और रोते रोते कहा कि
सर ऐसा अनर्थ मत कीजिएगा
नहीं तो मेरा " फुटुरे "(Future) ख़राब हो जाएगा।....
भैया कैसी तूने खबर सुनाई !
अब याद हमें तो नानी आई !
अब कैसे नोट ये बदले जाएँ,
चलो इन्हें अब आग दिखाएं,
अपना धंधा अब चौपट समझो,
आगे की अब आहट समझो,
ऊपर की सब गयी कमाई !
अब याद हमें तो नानी आई !
ईमान बेच कर किया इकठ्ठा,
उसका तो बैठ गया अब भट्टा,
अब घर का मंज़र नर्क हो गया,
इज़्ज़त का बेडा गर्क हो गया,
अब तक तो खाई खूब मलाई !
अब याद हमें तो नानी आई !
हम तो झटके में बेहाल हो गए,
कल के राजा कंगाल हो गए,
हम बड़े बड़े नोटों में खुश थे,
हर प्रकार के हमको सुख थे, #मोदी ने कैसी ये गाज़ गिराई !
अब याद हमें तो नानी आई !
जैसे कि रंग पहले थे, न दिख रहे हैं आजकल,
सितारे वो चाहत के, न दिख रहे हैं आजकल !
यहाँ तो कांटे ही नज़र आते हैं इधर गुलशन में,
अब फूलों भरे वो गोशे, न दिख रहे हैं आजकल ! #ज़िन्दगी के सफर में हमें रोज़ मिलते थे कभी वो,
अब #मुस्कान भरे चेहरे, न दिख रहे हैं आजकल !
क्या हुआ है मेरे अज़ीज़ों की महफिलों को दोस्तो,
अब कहकहों के सुर भी, न दिख रहे हैं आजकल !
हमसे न पूँछिये इस पुराने #दिल के हालात दोस्तो,
उसे तो अपनों के साये भी, न दिख रहे हैं आजकल !