कुछ बेचना चाहो तो, दाम घट जाते हैं अक्सर,
खरीदना है कुछ भी, दाम बढ़ जाते हैं अकसर !
न झांकता कोई भी हमारी ज़रुरत पे कभी भी,
मगर अपने मतलब से, दिल दुखाते हैं अकसर !
कर डाली क़ुर्बान जिन पर सारी दौलतें हमने,
हमसे वो बच्चे भी अब, दूरीयां बनाते हैं अक्सर !
वक़्त के साथ बदल जाती हैं दुनिया की रस्में,
जो दिखते थे कभी अपने, बदल जाते हैं अक्सर !
इसी को कहते हैं असलियत में #ज़िन्दगी ,
जहां बहार हो या पतझड़, आते जाते हैं अक्सर !!!
गर बस में नहीं है कुछ भी, तो झूठा दिलासा तो दे !
चल बातों का ही सही, दिल को कुछ सहारा तो दे !
डूबते हुए को तो तिनके का सहारा भी काफी है,
कम से कम तू, साथ निभाने का कोई वादा तो दे !
तू समझता है कि शायद तेरा भी गुनहगार हूँ मैं,
तो तू भी मुझ को, दी सजा का कुछ इशारा तो दे !
सींचा है प्यार का ये पौधा बड़े ही जतन से दोस्त,
कर दे बर्बाद मगर, नफ़रत का कुछ मसाला तो दे !
वक़्त के साथ क्यों टूट जाते हैं अटूट रिश्ते,
कोई रिश्ता तोड़ने से पहले, सबब का हवाला तो दे !
दिल के तूफ़ान को, होठों तक ज़रा आने तो दीजिये,
ग़मों के काले बादलों को, दूर ज़रा जाने तो दीजिये !
दुखाया है #दिल हमारा इन बेकार के जज़्बातों ने ही,
अब दिलों की कालिखों को, ज़रा मिटाने तो दीजिये !
ज़िगर में लगे ज़ख्मों को यूं नासूर न बनने दो दोस्त,
हाज़िर हैं हम आज भी, मरहम ज़रा लगाने तो दीजिये !
खुदा के वास्ते मिटा दो वो पुरानी बदरंग यादें,
नए रंगों से हम को रंगोलियां, ज़रा सजाने तो दीजिये !