इक वो बदनसीब, जिसका कोई चाहने वाला नहीं,
इक वो दीवाना, जिसका कोई दीवाना नहीं
है एक परवाना, जिसका कोई ठिकाना नहीं,
करते हो क्यूँ जीना उसका दुश्वर यारों,
जब तुमने उसे कभी जाना ही नही
कुछ माहिर है वो सितम सहने में ,
यूँ किसी के #नखरे उठाने वाला नही
नही पता क्या सोचकर देते है दर्द
इन्सान है यारो कोई खुदा रहमत वाला नहीं
न था कोई हिसाब बाक़ी मुझ पर उसका,
फिर भी मेरा सब कुछ वो चुरा कर ले गया |
इस वक़्त मशरूफ़ हूँ बर्बादियों के जश्न में,
साथ अपने यादें भी मेरी चुरा कर ले गया |
न छोड़ा सबूत भी मेरी बेगुनाही का उसने,
मेरी वफाओं के सबूत भी चुरा कर ले गया |
छोड़ गया वो गर्दिशों का ये मंज़र मेरे लिए,
ख़ुशी की महफ़िलें भी वो चुरा कर ले गया |
अब तो ज़िन्दगी भी लगती मुझे पराई सी,
मेरे सीने से धड़कनें भी वो चुरा कर ले गया |
जियें भी तो अब जियें किसके लिए ?
मेरे जीने का बहाना भी वो चुरा कर ले गया |
किसी से दिल लगाने में क्या रखा है,,,
किसी के #प्यार में तबाह हो जाने मे क्या रखा है...
मिलता है कितना दर्द कर के मोहब्बत यारों,
सितम ऐसा ढ़ाने में अब क्या रखा है,
रोते है गुमसुम यादों में #तन्हा होकर...
हसीं अपनी यूँ दबाने में क्या रखा है !!!
किसको बताएँ बिखर गयी #जिन्दगी तिनका तिनका,
किसी को दास्ताँ_ए_जिन्दगी सुनाने में क्या रखा है !!!
होता है पता #अन्जाम ए #मोहब्बत का सबको,
फिर ऐसा #जुर्म कर जाने में क्या रखा है !!!
दिल खोल कर रख दिया, उन्हें #दिलदार समझ कर
अपनी ज़िन्दगी दे दी हमने, अपना #यार समझ कर
अफ़सोस न समझ सके वो मेरी चाहतों को कभी,
हर ज़ुल्म सहता रहा बस, उनका #प्यार समझ कर #हसीन सपने संजोता रहा मैं यूं ही #दीवाना बन कर,
मगर वो सताते रहे यूं ही, मुझको बेकार समझ कर
मैं फिर भी खुश हूँ मुझे गिला कुछ भी नहीं,
क्यों बहाऊँ मैं आंसू, उनको अपना प्यार समझ कर !!!