वक़्त के साथ, लोगों की फ़ितरत बदल जाती है
शौहरत के साथ, लोगों की चाहत बदल जाती है
एक वक़्त था कि #मुस्करा के उठते थे सुबह हम,
आज उठते हैं तो, चेहरे की रंगत बदल जाती है
दिखती हैं खड़ी मुसीबतें मुंह बाये सामने रोज़,
दिन ढलते ढलते, चेहरे की हालत बदल जाती है
सुबह जो खाते हैं ईमान ओ वफ़ा की कसम यारो,
सुबह से शाम होते, उनकी नीयत बदल जाती है
बिगड़ जाते हैं रिश्ते इस जुबाँ के तीरों से,
इनकी तीखी चुभन से, उनकी सूरत बदल जाती है...
हमने एक दूसरे से जब वफ़ा करनी चाही थी
तब ज़िन्दगी हम दोनों से बेवफाई कर गयी
एक दूजे से अलग हो के कुछ ना रह गया था
बस यादें ही थी जो चोटों की भरपाई कर गयी
कभी ना खुश रहे पाएंगे ऐसा काम ये #जुदाई कर गयी
ज़िन्दगी से उलझने से क्या फायदा
दुनिया को समझने से क्या फायदा
बदली है #दुनिया तो तू भी बदल जा
यूं निरर्थक मचलने से क्या फायदा
क्यों भर रखा है दिल में गुवारों को
यूं घुट घुट के मरने से क्या फायदा
गुज़ारे लम्हों को भला क्या सोचना
अपने आप से लड़ने से क्या फायदा
न तेरे बस की तो छोड़ दे #भगवान पे,
खुद ही #खुदा बनने से क्या फायदा
जो दिया है ख़ुदा ने सब्र कर उस पर
आफतों को खरीदने से क्या फायदा
मिलेगी #मंज़िल भी संभल कर चल
गलत राहों पे चलने से क्या फायदा
जिस शख्स में हमदर्द तलाशती हैं मेरी नज़रें
वो ही क्यूँ दर्द बाँट जाता है ?
जिसकी राहों में पलकें बिछाता हूँ रोज़
वो ही मेरी राहों से कदम चुराता है
मुझे तो उसके सिवा कुछ याद ही नहीं
फिर क्यूँ उसके लिए #गुमनाम हूँ मैं ?
तुझमे मेरी पहचान ढूंढता
मगर खुद से अनजान हूँ मैं...
नहीं मिलती है मांगने से एक अदद ख़ुशी,
मगर बिन मांगे ग़म हज़ार मिल जाते हैं |
नहीं मिलता ढूढ़ने से कहीं एक भी अपना,
मगर बिन ढूंढें #दुश्मन हज़ार मिल जाते हैं |
जो दूर से दिखता है ज़रूरी नहीं कि हो वैसा,
यहां तो अनचाहे धोखे हज़ार मिल जाते हैं |
ज़रा संभल कर चलना #ज़िन्दगी की राहों पे,
यहां तो हर कदम पे रोड़े हज़ार मिल जाते हैं |
किसी पे यकीन करना बुरा नहीं होता,
पर इस दुनिया में बेवफा हज़ार मिल जाते हैं |