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Insan kyun Badal Jata Hai

कमाल है ना........
#आँखे किसी की #तालाब नहीँ,
फिर भी भर आती हैँ...
#दुश्मनी कोई #बीज नही,
फिर भी बोयी जाती है...
#होठ किसी का #कपड़ा नही,
फिर भी #सिल जाते हैँ...
#किस्मत किसी की सखी नही, फिर
भी #रुठ जाती है...
#बुद्वि किसी की #लोहा नही,
फिर भी क्यूँ #जंग लग जाती है...
#आत्म सम्मान किसी का #शरीर नहीं,
फिर भी #घायल हो जाता है...
और
जब इन्सान #मौसम की तरह नही,
तो फिर क्यूँ #बदल जाता है... !!!

Kudrat bhedbav nhi karti

कभी सूरज किसी को रोशनी कम नहीं देता
कभी चाँद किसी को चाँदनी कम नहीं देता
हवाएँ बहती हैं बराबर सभी के लिए
कभी #बादल किसी को बारिश कम नहीं देता
सितारे चमकते हैं रात भर सब के लिए
आसमां कभी किसी को रहमत कम नहीं देता
पेड़ों की छाँव भी बराबर है सभी के लिए
वो किसी पखेरू के लिए जगह कम नहीं देता
अफसोस, ये आदमी है हो करता है भेद
वर्ना क़ुदरत का हाथ किसी को कम नहीं देता...

Lekin Bharosa Toot Jata Hai

Kuch Pane Ki Chaahat Mein,
Bohat Kuch Chhoot Jata Hai,
Na Jane Sabr Ka Dhaaga,
Kaha Par Toot Jata Hai...

Jara Batao Kise Hamrah Kehte Ho ?
Yaha To Apna Saya Bhi
Kahin Par Saath Rehta Hai,
To Kahin Par Sath Chhoot Jata Hai...

Ajab Shey Hai Ye Rishte Bhi
Bahut Mazboot Lagte Hain,
Zara Si Bhool Se Lekin,
Bharosa Toot Jata Hai....

Khwab Adhura Hai Mera

हर शख्स मुझे
‪#‎ज़िन्दगी‬ जीने का तरीका बताता है....!
.
:
उन्हें कैसे समझाऊ
कि एक ‪#‎ख्वाब‬ अधूरा है मेरा...
वरना जीना तो मुझे भी आता है....!!!

Dil patthar bna liya

अपने वज़ूद को ही, अंधेरों में छुपा लिया हमने
कमज़ोर दिल को, इक पत्थर बना लिया हमने
सोच कर कि खुशियों को हमारी दरकार नहीं,
बस ग़मों को अपना, हमसफ़र बना लिया हमने
न बुझती थी शमा जिस घर की रातों में कभी,
अब खुद का दिल जलाकर, दीया बुझा दिया हमने
जब रहमत न मिली हमें अपनों से कभी दोस्तों,
तो उनको भुला, गैरों को अपना बना लिया हमने
कैसे थे क़ातिल चले गए अधमरा छोड़ कर "मिश्र",
उन्हीं ज़ख्मों को, निशान ए वफ़ा बना लिया हमने