कमाल है ना........ #आँखे किसी की #तालाब नहीँ,
फिर भी भर आती हैँ... #दुश्मनी कोई #बीज नही,
फिर भी बोयी जाती है... #होठ किसी का #कपड़ा नही,
फिर भी #सिल जाते हैँ... #किस्मत किसी की सखी नही, फिर
भी #रुठ जाती है... #बुद्वि किसी की #लोहा नही,
फिर भी क्यूँ #जंग लग जाती है... #आत्म सम्मान किसी का #शरीर नहीं,
फिर भी #घायल हो जाता है...
और
जब इन्सान #मौसम की तरह नही,
तो फिर क्यूँ #बदल जाता है... !!!
कभी सूरज किसी को रोशनी कम नहीं देता
कभी चाँद किसी को चाँदनी कम नहीं देता
हवाएँ बहती हैं बराबर सभी के लिए
कभी #बादल किसी को बारिश कम नहीं देता
सितारे चमकते हैं रात भर सब के लिए
आसमां कभी किसी को रहमत कम नहीं देता
पेड़ों की छाँव भी बराबर है सभी के लिए
वो किसी पखेरू के लिए जगह कम नहीं देता
अफसोस, ये आदमी है हो करता है भेद
वर्ना क़ुदरत का हाथ किसी को कम नहीं देता...
अपने वज़ूद को ही, अंधेरों में छुपा लिया हमने
कमज़ोर दिल को, इक पत्थर बना लिया हमने
सोच कर कि खुशियों को हमारी दरकार नहीं,
बस ग़मों को अपना, हमसफ़र बना लिया हमने
न बुझती थी शमा जिस घर की रातों में कभी,
अब खुद का दिल जलाकर, दीया बुझा दिया हमने
जब रहमत न मिली हमें अपनों से कभी दोस्तों,
तो उनको भुला, गैरों को अपना बना लिया हमने
कैसे थे क़ातिल चले गए अधमरा छोड़ कर "मिश्र",
उन्हीं ज़ख्मों को, निशान ए वफ़ा बना लिया हमने