Log Bhi Patthar Dil
दिल के ज़र्रे ज़र्रे पे, आंसुओं से इबारत लिखी है हमने
यादों के कोरे कागज़ पे, हर शिकायत लिखी है हमने
पत्थरों के मकानों में लोग भी पत्थर दिल हैं "मिश्र",
इस दुनिया ने निभायी कैसे, वो अदावत लिखी है हमने
दिल के ज़र्रे ज़र्रे पे, आंसुओं से इबारत लिखी है हमने
यादों के कोरे कागज़ पे, हर शिकायत लिखी है हमने
पत्थरों के मकानों में लोग भी पत्थर दिल हैं "मिश्र",
इस दुनिया ने निभायी कैसे, वो अदावत लिखी है हमने
ऐ मेरे #भगवान बता दो...
क्या #लड़की #इंसान नही ?
#लडके का है मान #जगत मे...
क्या #लड़की का कोई #मान नही ?
जिस #घर में लड़की #जन्म लेती है
क्या #उसका कोई #सम्मान नही
जब #लड़का है #सन्तान पिता की
क्या लड़की #पिता की #सन्तान नही ?
#खान_दान की #इज्ज़त है जो
#कुल का #वंश_बढ़ाती है
घर की #रौनक को बढ़ाकर
जो #घर का #द्वीप_जलाती है
#दहेज के पीछे #ज़ान ग़ँवाती
#पिता का वो क्या #मान नही
#ऐ मेरे #भगवान बता दो
#क्या लड़की इंसान नही ?
झूठ बोलना …
बच्चों के लिए … पाप ,,
कुंवारों के लिए …. अनिवार्य ,,
प्रेमियों के लिए ….. कला ,,
और …
#शादीशुदा लोगों के लिए …
शान्ति से जीने का मार्ग होता है...
Kabhi Milo To Batau Tumhe #Dard Kitna Hai,
Jo Kiya Maine Wo Sabar Kitna Hai,
Ae Jaana Kiye Hai Jo Mujh Par Tune Sitam,
Kabhi Aa Kar Dekh Unka Asar Hua Kitna Hai...