Chahat Sabhi Ko Jarur Hoti Hai
ऊंचाइयाँ छूने की चाहत सभी को ज़रूर होती है
अरमान सजाने की चाहत सभी को ज़रूर होती है
कोई कितनी ही कसम खाये मगर
लोगों को मुफ्त में खाने की चाहत ज़रूर होती है
ऊंचाइयाँ छूने की चाहत सभी को ज़रूर होती है
अरमान सजाने की चाहत सभी को ज़रूर होती है
कोई कितनी ही कसम खाये मगर
लोगों को मुफ्त में खाने की चाहत ज़रूर होती है
लोग किसी के अरमानों को, बेरहमी से कुचल देते हैं
पहले सिर पर बिठाते हैं, फिर ज़मीं पर पटक देते हैं
यही तो चाल है दोरंगे लोगों की,
पहले तो मतलब निकालते हैं, फिर हाथ झटक देते हैं
वो हमारी जान भी लेलें तो कोई बात नहीं,
अगर हम मुंह खोलें तो हंगामा
वो झूठ की महफिल सजाएं तो कोई बात नहीं,
अगर हम सच बोलें तो हंगामा
अपने झूठ का खंडन वो करदें तो कोई बात नहीं,
अगर हम कुछ बोलें तो हंगामा
जब जनता फंसाती है उनको तो दोष हमको देते हैं,
अगर हम खंडन कर दें तो हंगामा
kabhi dost kehte ho, kabhi dua dete ho,
kabhi bewaqt neend se jaga dete ho...
par jab yaad karte ho, khuda ki kasam
Zindagi ke sare gum bhula dete ho....
Kehte Hain Insan Apni Kismat
Khud Likhta Hai,
Or Shayad Ye Galat Hai,
Kyunki Agar Apni Kismat Khud Likh Pate,
To Kisi Ke Paas Aaj Dard Na Hota.... :(