ये कुर्सी का चस्का ऐसा जो सबको ही लग जाता है
छोड़ छाड़ सब धर्म कर्म उसके पीछे लग जाता है
जो धूनी अलघ जगाते थे वो भी इसके दीवाने हैं
जो अल्लाह की खिदमत में थे वो भी इसके दीवाने हैं
आम आदमी मूरख बन कर इनका साथ निभाता है
कुर्सी जब मिल जाती है तो उसको ही आंख दिखाता है
कालिज का जिसने मुंह नहीं देखा वो मंत्री बन जाता है
पढ़े लिखों का आका बनकर उन पर रौब जमाता है
यौवन बीता आया बुढ़ापा पर फिर भी कुर्सी प्यारी है
इसे लोकतंत्र कहते हैं भाई इसकी तो महिमा न्यारी है
हर दिन अगर सुहाना है, तो उसकी मंज़िल रात क्यों है
जीत में गर खुशी है, तो खेल में हार की बात क्यों है
पैदा हुए हम जीने के लिये, फिर मरने की बात क्यों है
जब इत्रेमोहब्बत महकता है, तो नफरत की बात क्यों है
जब अपनों की ये दुनिया है, तो बेगानों की बात क्यों है
दोस्ती की कसम खा कर भी, पीछे से घात क्यों है
Gor pharmaiyega..
AaJ KaL Ki Ladkiya Husn Pe NaaZ Karti Hain..
Wah...wah...
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AaJ KaL Ki Ladkiya Husn Pe NaaZ Karti Hain..
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Grammar to aata nahi Magar
English mein baat karti hain.
Who is a Friend?
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Friend is not sum1 who gives ur Bail
When U R in Jail..
But,
Friend is a Person who IS IN JAIL WIth U
& says
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“Bola tha na Fasenge” :P