काश इंसान भी नोटों की तरह होता,
फिर उसको भी रौशनी की तरफ करके,
हम पहचान पाते कि कौन सा,
असली है और कौन सा नकली…
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फिर उसको भी रौशनी की तरफ करके,
हम पहचान पाते कि कौन सा,
असली है और कौन सा नकली…