पोता: दादी आपने कौन-कौन से देश घूमे हैं ???
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दादी: अपना पूरा हिंदुस्तान,
पाकिस्तान, अफगानिस्तान , उज़ेबिस्तान….
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पोता: अब कौन सा घूमोगी….
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पीछे से छोटा पोता बोला…..
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कब्रिस्तान…
दे चप्पल दे चप्पल 😀😝
क्यों फिर रहे हो यूं ही, ये पुराने ज़ख़्म लिए हुए,
जलते रहोगे कब तक, अपनों की शरम लिए हुए !
अब न रहा दुनिया में कोई साफ़ दिल मेहरवान,
कब तक जियोगे यक़ीन में, झूठी कसम लिए हुए!
क्यों क़ैद हो तुम उन ज़फाओं की यादों में दोस्त,
कैसे रहोगे दुनिया में, उल्फ़त का धरम लिए हुए!
वो वक़्त अब गुज़र गया जिसे ढूंढते हो दर ब दर,
जी सकोगे कैसे अब, अपना ईमानो करम लिए हुए !
निकाल फैंको ग़ुबार सारे जो सजा रखे हैं सालो से,
वरना न चल सकोगे दोस्त, इतना वहम लिए हुए !
अच्छा वक़्त सिर्फ उसी का होता है,
जो कभी किसी का बुरा नहीं सोचते !!
सुख दुख तो अतिथि है,
बारी बारी से आयेंगे चले जायेंगे..
यदि वो नहीं आयेंगे तो
हम अनुभव कहां से लायेंगे !!!
जूनून-ए-मोहब्बत, बरक़रार है आज भी,
इस #दिल को उनका, इंतज़ार है आज भी !
बहुत देखे हैं हमने हारे हुए दिल वाले भी
मगर अपना तो #दिल, बेक़रार है आज भी !
मुश्किलों का क्या आती ही है #ज़िन्दगी में,
इन हादसों से अपना तो, क़रार है आज भी !
नफरतों का क्या कोई भी कर ले किसी से,
पर #मोहब्बत की सज़ा, वज़नदार है आज भी !
न करो अफसोस दुनिया में आने का दोस्त ,
इंसानियत की दुनिया, तलबगार है आज भी !!!