न बचा है कोई ग़म, मुझे अब रुलाने के लिए ,
मान गया है दिल भी, सब कुछ भुलाने के लिए !
नफरतों की आग ने जला दिया मेरा सब कुछ,
न बची हैं उल्फतें, किसी का दिल चुराने के लिए !
न ढूंढो अब कोई भी नया चाँद मेरे लिए दोस्तो,
न बची है जगह कोई, अब चाँदनी छुपाने के लिए !
न रहा कोई अपनापन न रिश्तों का कोई बंधन,
दिखते हैं तैयार सब, बस कश्तियाँ डुबाने के लिए !
मैं तो एक जाहिल ही नहीं काहिल भी हूँ दोस्त,
न आतीं हैं मुझे तरकीबें, आसमां झुकाने के लिए !
मंदिर में भजन गाने से क्या मिलेगा,
झूठी भक्ती दिखाने से क्या मिलेगा !
अंदर भरा है मैल #नफ़रत का इतना,
कि रोज़ गंगा नहाने से क्या मिलेगा !
निहारता है सब कुछ वो ऊपर बैठ कर,
उससे सच को छिपाने से क्या मिलेगा !
भुलाया खुशियों में बेकार समझ कर उसे,
अब दुखों में याद आने से क्या मिलेगा !
भेज था हमें तो पैग़ामे #मोहब्बत दे कर,
उसकी मर्जी भूल जाने से क्या मिलेगा !
जो हर जगह मौजूद है हर पल हर घड़ी,
उसके लाखों घर बनाने से क्या मिलेगा !
ज़रा झांक कर देखो अपना गिरेवाँ दोस्त,
कमियाँ औरों की बताने से क्या मिलेगा !!!
#Wife : जब मैं #शादी हो कर यहां आई थी
तो घर में बहुत मच्छर थे..
अब बिलकुल मच्छर नही हैं..एसा क्यों? #Husband : हमरी शादी होने के बाद
मच्छरों ने ये कहकर मेरा घर छोड़ दिया
कि अब तो परमानेंट खून पीने वाली आ गयी है…
हमारे लिए तो बचेगा ही नहीं !!! 😜