पूछूँगा विधाता से मैं, कि ये कैसा मुकद्दर बना दिया,
न बचा था ठौर कोई, जो आँखों को समंदर बना दिया !
सारी ज़िंदगी गुज़र गयी यूं ही अपनों के आगे झुकते,
क्या बिगाड़ा था उसका, जो इतना कमतर बना दिया !
दर्द औरों का देख कर खुशियां भुला दीं मैंने अपनी,
मगर मेरे लिए हर #दिल, उसने क्यों पत्थर बना दिया !
जिसे भी समझा कुछ अपना चला गया देकर धोखा,
क्यों ज़िन्दगी को उसने, बोझिल इस कदर बना दिया !
अगर और भी सितम थे झोली में उसकी वो भी दे देता,
भुगत लेता उनको भी, अब तो दिल बेअसर बना दिया !
नहीं हूँ मैं अकेला जाने कितनों के ये जज़्बात हैं यारो,
कि उसने #ज़िंदगी तो दे दी, पर जीना बदतर बना दिया !
कुंडलियो का मिलान कर के,
पंडित जी बोले :- बधाई हो,
कुंडली तो ऐसे मिली है,
जैसे श्री राम और सीता जी की मिली थी |||
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इतना सुनते ही लड़की बोली :-
माँ, मैं इस लड़के से शादी नहीं करूंगी,
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मैंने तो यूरोप घूमने के सपने देखे हैं ,
वन-वन भटकने के नहीं !!!
कुछ लोगों को, बस कमियां गिनने की आदत होती है,
दूसरों के घर में, झाँक कर निकलने की आदत होती है !
ख़ुदाया भले ही न आता जाता हो उनको कुछ भी मगर,
खुद को हर फन में, माहिर समझने की आदत होती है !
कोंन है दुनिया में जो न जानता ऐसे लोगों की फितरतें,
फिर भी उन्हें जाने क्यों, सुर्ख़रू बनने की आदत होती है !
बच के ही रहने में कुशल है ऐसे कुशल लोगों से दोस्त,
उन्हें बिना मांगे ही, मशवरा देते रहने की आदत होती है !