Joota Chupai Tradition
जूता छुपाई" की रस्म शादियों में
"सालियां" करती है।
पर पता नहीं
मंदिरों में ये रस्म
कौन से "साले" करते है। :D :P
जूता छुपाई" की रस्म शादियों में
"सालियां" करती है।
पर पता नहीं
मंदिरों में ये रस्म
कौन से "साले" करते है। :D :P
ख़ुशी से जीने के लिए, ज़रा सा प्यार काफी है
नहीं है चाह मिलने की, बस इंतज़ार काफी है
कोई बात नहीं कि कोई हमसे दूर है कितना,
दूर रह कर भी, #मोहब्बत का इक़रार काफी है
बस बहुत है कि पूंछते है वो खैरियत हमारी,
खुदाया उनकी मेहरबानी का, इज़हार काफी है
बस हमारे लिए तो खास हैं उनकी भूली यादें,
वो आते रहें ख्वाबों में, इतना ऐतबार काफी है
जो लिखा #नसीब में उतना ही मिलेगा दोस्त,
बस ग़फ़लतों में जीने का, थोड़ा क़रार काफी है
अपनी "आदतों" के अनुसार चलने में,
इतनी "गलतियां" नहीं होती....
जितनी दुनिया का ख्याल और लिहाज़…
रख कर चलने में होती है !!!
दुनिया की सारी दौलतें भी, हैं भला किस काम की,
अपनों के बिन ये शौहरतें भी, हैं भला किस काम की !
उनकी रौनक से रोशन था मेरा ये घर आंगन कभी
अब तो सूरज की रोशनी भी, है भला किस काम की !
ग़म है तो सिर्फ इतना कि दूर हो गये मुझसे अपने
अब तो जीने की चाहत भी, है भला किस काम की !
वो न समझें इस दर्द को ये तो है उनकी मर्ज़ी दोस्त,
अब तो फिज़ूल में ये सोच भी, है भला किस काम की !
उनका दिया हर रंजो गम, हमें अच्छा लगता है,
उनका ढहाया हर सितम, हमें अच्छा लगता है !
सुकून मिलता है उनकी दी हर चोट से दिल को,
रिसते ज़ख्मों को सहलाना, हमें अच्छा लगता है !
उनकी जफ़ाओं से दिल लबरेज़ रहता है हर दम,
पर उनके लिये आंसू बहाना, हमें अच्छा लगता है !
मेरी तड़प से गर वो खुश हैं तो शिकवा नहीं दोस्त,
उनकी खुशियों का हर ढंग, हमें अच्छा लगता है !