ishq ke bimar
जिधर देखो #इश्क के बीमार बैठे हैं
हज़ारों मर गये लाखों तैयार बैठे हैं...
-.-
साले बर्बाद होते हैं लड़कीयों के पीछे
और कहते हैं कि,
सरकार कि वजह से #बेरोजगार बैठे हैं...
जिधर देखो #इश्क के बीमार बैठे हैं
हज़ारों मर गये लाखों तैयार बैठे हैं...
-.-
साले बर्बाद होते हैं लड़कीयों के पीछे
और कहते हैं कि,
सरकार कि वजह से #बेरोजगार बैठे हैं...
लोग दिल में घुस कर, चले आते हैं क्यों,
फिर #तमन्ना जगा कर, चले जाते हैं क्यों...
जब साथ जीने की जगती है थोड़ी आशा,
वो तभी #दिल तोड़ कर, चले जाते हैं क्यों...
करते हैं भरोसा जान से ज्यादा जिन पर
वो छोड़ कर ज़रुरत पर, चले जाते हैं क्यों...
मुखौटे चढ़ा कर दिखते हैं वो शरीफ़ज़ादे,
पर वो #नसीब जला कर, चले जाते हैं क्यों...
जिन्हें उम्र भर समझते रहे अपना,
वक़्त बेवक़्त वो रुला कर, चले जाते हैं क्यों !!!
आदमी :- कमर में बहुत दर्द है...
जरा पड़ोसी के घर से #iodex ले आओ।
.
Wife:- वो नहीं देंगे । वो बहुत कंजूस है।
आदमी:- हाँ, है तो बहुत कंजूस साले...
रहने दो, अलमारी में से अपनी ही निकाल लो,
आज दर्द कुछ ज्यादा ही है...
इस #दिल में, मोहब्बत की शमा जलती रही ,
यादों का बोझ लिए, ये ज़िन्दगी चलती रही !
आता रहा जलजला ज़माने भर का लेकिन,
बस टकराते रहे उस से, और उम्र ढलती रही !
उम्र भर सताता रहा फरेबियों का काफ़िला,
पर ख़ुदा के फज़ल से, जान बस बचती रही !
गर्दिशे दौरां में न पकड़ा बाजू किसी ने मगर,
दरिया ए ग़म से, ज़िंदगी बस निकलती रही !
यही है फ़साना तमाम #ज़िन्दगी का,
कभी ये ऊपर चढ़ी, तो कभी बस गिरती रही !
लेते हैं हर चीज़ मेरी, अपना सामान समझ कर,
जब मांगते हैं हम, तो देते है अहसान समझ कर !
गैरों से बात करते हैं जैसे कि वो अपने हैं उनके,
पर हमसे पेश आते हैं वो, पराया इंसान समझ कर !
छुपा रखा है उनको #ज़िन्दगी समझ कर दिल में,
मगर पेश आते हैं हमसे वो, अनजान समझ कर !
हमें #मोहब्बत है उनसे जानते हैं बदस्तूर वो मगर,
उड़ा देते हैं जज़्बात मेरे, वो एक नादान समझ कर !
कर दी निसार उन पर ज़िन्दगी की हर ख़ुशी,
पर भूल गया हमें वो, खोया हुआ ईमान समझ कर !