एक अजीब दास्तान है मेरे सफरनामे की
वहां से चल कर यहां तक पहुँच पाने की
कभी तो किस्मत ने साथ छोड़ा रस्ते में
तो कभी रंग लायी साजिश इस ज़माने की
लोग उतने ही दूर होते गए हमें छोड़ कर
जितनी कोशिश की हमने उनको मनाने की
सब को फ़िक्र थी सिर्फ अपने ही सफर की
न की किसी ने मेहर मुझे मंज़िल बताने की
अकेला ही चला हूँ मैं अंजान राहों पे
न थी किसी के पास फुर्सत मेरे साथ आने की
लाख टके की बात :-
जब क्लास में कोई अच्छा और बुद्धिमान बच्चा
माॅनिटर बन जाता है तो
सारे नालायक और #बदमाश बच्चे एक हो जाते है...
" बस यही हमारे #देश मे
PM - नरेन्द्र मोदी - के साथ हो रहा है "