हमें आसमां के सितारे, अब नहीं चाहिए
हमें समंदर के किनारे, अब नहीं चाहिए
डूबती है कश्ती तो डूब जाये अच्छा ही है,
हमको पतवार के सहारे, अब नहीं चाहिए
बाहर की दुनिया न रही जीने लायक अब,
हमें चाहत के झूठे इशारे, अब नहीं चाहिए
क्या मिला हमें झूठी तसल्ली के नाम पर,
हम को झूठ के झूठे सहारे, अब नहीं चाहिए
बेरहम दुनिया में कैसे जी पाओगे ?
हम को जीने के बहाने, अब नहीं चाहिए
अपनों की ख़ुशी, दुनिया के ग़म भुला देती है
नेक दिली, एक आदमी को इंसान बना देती है
ज़रा संभल के चलना ज़िंदगी की डगर पर,
ज़रा सी भी चूक, आदमी को शैतान बना देती है
न करो इच्छा किसी से मदद पाने की दोस्त,
औरों की मदद, आदमी को नाकाम बना देती है
जो चीज़ अपनी है उस पर भरोसा करो,
दीगर की चाहत, आदमी को बेईमान बना देती है
चेहरों के लिए आईने कुर्बान किये हैं,
इस शौक में अपने बड़े नुकसान किये हैं...
महफ़िल में मुझे गालियाँ देकर है बहुत खुश,
जिस शख्स पर मैंने बड़े एहसान किये हैं...
एक टीस है दिल में, जिसे ज़माने से छुपाये बैठा हूँ
किसी की ज़फ़ाओं का सदमा, दिल में बसाये बैठा हूँ
गर चर्चा भी करूँ तो रो देता है ये नादान दिल,
कहीं हो न जाये वो बाग़ी, उसको मैं बहलाये बैठा हूँ
पता है कि चाँद सितारे न आएंगे जमीं पर कभी,
मैं फिर भी उन्हें, तोड़ लाने की ज़िद बनाये बैठा हूँ
न समझ लेना कि मैं इक पागल दीवाना हूँ कोई,
मैं तो पूरे होश में, #मोहब्बत का दीया जलाये बैठा हूँ
लगता है कि ज़िन्दगी यूं ही गुज़र जाएगी,
फिर यूं ही किस के वास्ते, झूठी आस लगाये बैठा हूँ...