Dost Saath Naa Ho To
दोस्त साथ हो तो #रोने में भी #शान है...
#दोस्त ना हो तो #महफिल भी #श्मशान है...
सारा #खेल तो दोस्ती का ही है #यारों...
वरना ज़नाजा और #बारात भी एक समान है....
दोस्त साथ हो तो #रोने में भी #शान है...
#दोस्त ना हो तो #महफिल भी #श्मशान है...
सारा #खेल तो दोस्ती का ही है #यारों...
वरना ज़नाजा और #बारात भी एक समान है....
हम तो उनकी अदाओं को, उनका प्यार समझ बैठे
हम उनकी शराफत को, उनका इज़हार समझ बैठे
वो तो इक गुलाब था किसी और के गुलशन का,
पर हम तो उन्हें अपने आँगन की, बहार समझ बैठे
न सोचा न समझा न अपनी तक़दीर को टटोला,
हम और की चाहत पर अपना इख्तियार समझ बैठे
ले उडीं सब कुछ अचानक बे-वक़्त की वो आंधियाँ,
मगर हम पागल उन्हें, मोहब्बत की बयार समझ बैठे...
जो न सिखा सकीं किताबें, ज़िन्दगी ने सिखा दिया
उसने चेहरे की इबारतों को, हमें पढ़ना सिखा दिया
जो झूठ का नक़ाब ओढ़े बनते थे हमारे जानो जिगर,
उनकी असलियत से परदा, हमें उठाना सिखा दिया
जो अल्फ़ाज़ हलक़ में फंसे रहते थे काँटों की तरह
इस दुनिया के सामने अब, हमें कहना सिखा दिया
उलझनों के दरिया से कई बार डूब कर बच निकले,
खुदाया #जिंदगी के झटकों ने, हमें तैरना सिखा दिया...
जिनके लिये दुनिया में, हम बदनाम हो गये
उनके दिल की हर बात पर, कुर्बान हो गये
जब देखा की अब उनके लिये बेकार हैं हम,
तब उनके लिये हम, कचरे का सामान हो गये
क्या करें ये दुनिया बड़ी ही बे रहम है दोस्तो,
इश्क़ में खा के ठोकरें, हम लहू लुहान हो गये
बहुत जंग हारे हैं हम वफाओं के नाम पर,
खुदाया हम तो इस दुनिया से, परेशान हो गये...