हर ग़म से गुज़रा हूँ, अब खुशियों का इंतज़ार नहीं
अब तक ज़िंदा हूँ मगर, अब जीने की दरकार नहीं
मैं तो मुरझाया फूल हूँ उजड़े हुए चमन का, मगर
चुभन से भर दूँ मैं किसी का दामन, मैं वो खार नहीं
दुनिया के बाजार में तो बिकता है सब कुछ मगर
मैं तो नाकाम चीज़ हूँ ऐसी, कि जिसका खरीदार नहीं
ये मतलब के नाते रिश्ते बड़े क़रीब से देखे हैं मगर
यहां पै किसी के दर्दो ग़म से, किसी को सरोकार नहीं
जानता हूँ कि अतीत के लिए रोना बेमानी है मगर,
क्या करूँ “मिश्र” इस दिल पै, मेरा कोई इख़्तियार नहीं...
या ख़ुदा, मेरे घर में भले ही अँधेरा रहे
पर उनके घर में #चांदनी का बसेरा रहे
आ जाये हमें #मौत भी तो कोई गम नहीं,
पर उनके दामन में खुशियों का डेरा रहे
मेरे मुकद्दर में हैं बस तन्हाइयों की रातें,
पर हमेशा उनकी #ज़िन्दगी में सवेरा रहे
गर उनका साथ है पार कर लूँगा समंदर भी,
फिर हर तरफ चाहे मुश्किलों का घेरा रहे...
यूँ ना कुरेदो मेरे #दिल को...
इसका घाव बहुत #गहरा है !
किसी की #चाहत का है बसा...
इसमें #प्यार बहुत गहरा है !
वो कर ना सके #इज़हार हमसे... #मोहब्बत का तो क्या हुआ यारों..
आज भी उनके #दिल में मेरी.. #चाहत का #प्यार बहुत गहरा है ||
एक महिला को मुंबई में नौकरी मिल गई।
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वह अकेली ही नौकरी ज्वाइन करने पहुंची,
वहां कंपनी ने उसे रहने के लिए एक फ्लैट भी दे दिया।
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महिला ने सोचा कि अपने पति को सूचना दे दूं
ताकि उन्हें चिंता न हो, उसने पति के लिए मोबाइल में एसएमएस लिखा
परन्तु गलती से गलत नंबर पर भेज दिया :/
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जिस आदमी को वह #SMS मिला उसकी पत्नी गुजर गई थी
और वह अभी-अभी अंतिम संस्कार करके लौटा था।
SMS पढ़ते ही वह आदमी बेहोश हो गया और उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
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SMS में लिखा था :-
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मैं सही-सलामत पहुंच गई हूं और
यहां रहने के लिए अच्छी जगह भी मिल गई है.....
आप बिलकुल चिंता मत करना बस
1-2 दो दिन में ही आपको भी बुला लूंगी।
..........आपकी पत्नी