मेरी ज़िंदगी ही अजीब है, और को क्या कोसना
जब ज़ख्म पाये अपनों से, गैरों को क्या कोसना
यादों के ऊंचे ढेर में दब गये अफसाने अपनों के,
मुश्किल से भूल पाये हैं, फिर से उन्हें क्या खोजना
सब को पता होती है अपने चेहरों की हकीकत,
कुछ भी न बदलेगा यारो, फिर आईना क्या पोंछना
वैसे भी क्या कमी है नये ज़ख्मों की आज कल,
जो भर चुके हैं घाव तो, फिर से उन्हें क्या नोचना...
जिधर देखो दुनिया में, बस दिखता है आदमी
फिर भी क्यों तन्हा सा, यहाँ दिखता है आदमी
चुप चाप जमाने के सहते हुए ज़ुल्मो सितम,
खुद ही अपनी लाश को, लिए फिरता है आदमी
अजीबो गरीब दुनिया का ये कैसा चलन है,
आदमी के ही हाथों रोज़, यहां मरता हैं आदमी
इक पल का चैन मयस्सर नहीं किसी को कभी,
ज़िन्दगी भर फ़िक्र से ही, यहां मरता है आदमी
चिंता से भरी रातें तो गुज़र जाती हैं जैसे तैसे
फिर सुबह से शाम तक, बिकता फिरता है आदमी
कही कुदरत की मार कभी सियासत के लफड़े,
यूं ही दुनिया के कष्टों में, यहां घुटता है आदमी...
Chintu: Philhaal Kya Karte Ho?
Mintu: #IIN Dropout Hoon :/ :(
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Chintu: Kya?
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Mintu: Net Pack Khatam Ho Gya Hai,
Papa Na #Recharge Ke Paise Nahi Diye,
Tabse Ghar Par Hi Hun!!! :P
लोग कहते हैं ज़मीं पर किसी को खुदा नहीं मिलता,
शायद उन लोगों को दोस्त कोई तुम-सा नहीं मिलता…
किस्मत वालों को ही मिलती है पनाह किसी के #दिल में,
यूं हर शख़्स को तो जन्नत का पता नहीं मिलता…
अपने सायें से भी ज़यादा यकीं है मुझे तुम पर,
अंधेरों में तुम तो मिल जाते हो, साया नहीं मिलता...
इस बेवफ़ा ज़िन्दगी से शायद मुझे इतनी #मोहब्बत ना होती,
अगर इस ज़िंदगी में #दोस्त कोई तुम जैसा नहीं मिलता…!!