मजबूर थे जो #मोहब्बत हम ज़ता न सके,,, #ज़ख्म खाते रहे मगर किसी को बता न सके...
चाहतों की हद तक #चाहा उनको यारो,,,
पर अपना #दिल निकाल कर उन्हें #दिखा न सके...
चाहते है उनको कितना हम,,, #अफ़सोस कि उनको ये #ज़ता न सके...
जब न कर सके #इक़रार उनसे #मोहब्बत का यारों...
तो हम भी #दर्दे दिल की #दांस्ताँ बता न सके...!!
एक क़तरा आँसू भी, उनसे बहाया न गया
किसी खौफ से, अपना मुंह उठाया न गया
मेरी #मौत पर भी वो हौंसला न जुटा पाये,
शायद दाग़ ए रंजिश, अभी हटाया न गया
दामन में समेंटे हैं मेरे हज़ार गीत लेकिन,
मेरा कोई तराना, उनसे गुन गुनाया न गया
किसको कातिल कहूँ क्या बताऊँ छोडो भी,
मगर गैरों से तो खंज़र, कभी उठाया न गया...
यकीं था मुझे अपने दिले नादाँ के वहम पर,
मगर हक़ीक़त से परदा, कभी हटाया न गया...
Agar Aansu na hote to
aankhien itni kubhsurat na hoti #Dard na hota Dil me to
khushiyon ki keemat na hoti...
poori hoti sab murade
to aaj ummido ki jarurat na hoti...
हमारी तड़प की बात छोडो...
सुना है खुदा भी उनके दीदार को तरसता है...
तुझसे मिलने की दरकार में....
तो ये आइना भी चमकता है...
क्यूँ आज #उदास सा है मेरा #चाँद यारो......
उसे मनाने की फिराक में तो
अम्बर को चीर कर #सूरज निकलता है...!!
आज कल दुनिया में यारो,
कोई किसी का #हमदर्द नहीं होता
लोग जनाज़े में भी न जाते,
गर खुद मरने का डर नहीं होता
मतलब परस्त #दुनिया में
सिर्फ अपना हित देखते हैं लोग,
आज कल किसी के पास,
गिरे को उठाने का ज़िगर नहीं होता...