उन दर्द भरे लम्हों को मत सोचो,
कहीं फिर से न कोई पीड उभर आये
जिनको भुलाया था बामुश्किल से,
कहीं फिर से न कोई तीर निकल आये
क्यों उलझे हो अतीत के झंझट में,
आगे जीवन अभी बहुत पड़ा है,
कहीं फिरसे न कोई कील निकल आये
हमने जो वादा किया वो ज़िंदगी भर निभाते हम
हर मोड़ पर उनकी खिदमत में नज़र आते हम
पर बीच मंझधार में हाथ क्यों छोड़ दिया,
पहले इशारा किया होता दुनिया ही छोड़ जाते हम
बिना हवाओं के कभी भी पत्ता नहीं हिलता
बिना खाद पानी के कभी फूल नहीं खिलता
गांठ में नोट हों तो प्यार की सोचिये,
आजकल यहां प्यार भी मुफ़्त में नहीं मिलता