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To jeena aa gya

जब तुम समझने लगो दर्द औरों का,
तो समझ लेना कि जीना आ गया !
जब तुम भुलाने लगो अपना दर्दे दिल,
तो समझ लेना कि जीना आ गया !
जब बंद कर दो टाँगें अड़ाना व्यर्थ में,
तो समझ लेना कि जीना आ गया !
जब निकाल फेंको तुम अपना अहम,
तो समझ लेना कि जीना आ गया !
जब कर लो यक़ीं ख़ुदा की नीयत पे ,
तो समझ लेना कि जीना आ गया !
जब छोड़ दो तुम सर्पों का कर्म उन पे,
तो समझ लेना कि जीना आ गया !
जब निकाल फेंको दुश्मनी का लफ्ज़ ,
तो समझ लेना कि जीना आ गया !
जब पकड़ लो दिल से ईमान का रस्ता,
तो समझ लेना कि जीना आ गया !
यारा जब आ जाएँ तुमको रिश्ते निभाने,
तो समझ लेना कि जीना आ गया !
जब तुम चलने लगो बस सीधी डगर पे ,
तो समझ लेना कि जीना आ गया !
जब पचा जाओ मेरी कमियों को ,
तो समझ लेना कि जीना आ गया !

Tarane Mohabbaton Ke

क्यों लिखते हो अय दोस्त, ये तराने मोहब्बतों के ,
जब कि दिखते हैं हर तरफ, अब साये नफ़रतों के !

तेरे अहसासे दिल को, भला कोंन समझेगा दोस्त,
जब कि यहाँ उठते हैं रोज़ अब, जनाज़े हसरतों के !

अब भूल जाओ यारो, वो खुशियों वो उमंगों के दिन,
अब तो दिखते हैं हर कदम पर, नज़ारे वहशतों के !

अब न कोई भी महफूज़ है, इस दुनिया के मेले में,
अब तो घुस चुके हैं हर दिल में, अंगारे दहसतों के !

न होइए मायूस यूं, ये तो दुनिया का चलन है 'मिश्र',
यूं ही मिलते रहेंगे हर तरफ, ये फ़साने हरकतों के !

Jo Roya Nahi Karte

जो हो गया उसे सोचा नहीं करते,
जो मिल गया उसे खोया नहीं करते,,,
हासिल उन्हें ही होती है सफलता,
जो वक़्त और हालात पर रोया नहीं करते,,,

Raah pe chalte rahiye

हो के मायूस यूँ ना शाम की तरह ढलते रहिये,,,
#ज़िंदगी एक भोर है #सूरज की तरह निकलते रहिये,,,
ठहरोगे एक पाँव पर तो थक जाओगे,,,
धीरे धीरे ही सही मगर राह पे चलते रहिये,,,

Kasoor Dhoondhta Hai

हर कोई हर किसी में, कसूर ढूंढता है।
न मिलता है गर पास, तो दूर ढूंढता है।

न झांकता है इंसान अपने दिल में यारो,
मगर खामियाँ दूसरों में, ज़रूर ढूंढता है।

छुपा लेता है ये आदमी ज़ख्म अपने तो,
पर नोचने को औरों के, नासूर ढूंढता है।

छुप गयी है ज़िंदगी आफतों की धूल में,
दिल फिर भी ज़र्द चेहरों में, नूर ढूंढता है।

न समझ पाए आदमी की तलब को,
न देखता शक्ल अपनी, पर हूर ढूंढता है।