ज़िंदगी यूं डर डर के नहीं गुज़र पाती है
क़यामत की रात भी यूं ही गुज़र जाती है
ज़रा सी देर में बदल जाता है मंज़र
बादलों को चीर कर धूप निकल आती है
लोग तो ज़ख्म देते रहेंगे हमेशा यूं ही
लेकिन हर ज़ख्म की दवा निकल आती है
फूलों सी खुश्बू बिखेर दो दुनिया में यारो
फिर ग़म नहीं गर ज़िंदगी बिखर जाती है
गर हिस्से में आयी तन्हाई तो क्या करेंगे
उनकी यादों में नींद न आई तो क्या करेंगे
अपने दर्द ए दिल को संभालेंगे कैसे
गर जमाना बन बैठा तमाशाई तो क्या करेंगे
दिल पर हमारा बस नहीं चलता यारो
किसी और से हो गयी आश्नाई तो क्या करेंगे
मोहब्बत की तपिश से बेहाल हैं हम
कलेजे में गर ठण्डक न आई तो क्या करेंगे
कांटों से भरी हैं ये उल्फत की राहें
गर हमें मंज़िल न मिल पाई तो क्या करेंगे
बस यही सोच कर परेशान हैं हम
कि हमारी ज़िंदगी पे बन आई तो क्या करेंगे ?
Apni majboori kisi ko batayi nahi jati
Apni bhari aakhein kisi ko dikhayi nahi jati
Chal jati hai kalam har panne par
lekin #Mohabbat ki dastan har panne par likhi nahi jaati
ज़िंदगी का हर कदम, खुद के लिये नहीं होता
दुनिया का हर इल्म, सब के लिये नहीं होता
जो खुद की गलतियों से सबक नहीं लेते,
दुनिया का कोई सबक, उनके लिये नहीं होता...