Dil me hai aas use pane ki
Har baar ki hai koshish use bhulane ki
Phir bhi hai aas Dil me use pane ki
Wo mera na tha na hoga kabhi,,,
Phir bhi hai ek kasak use apnane ki...
Har baar ki hai koshish use bhulane ki
Phir bhi hai aas Dil me use pane ki
Wo mera na tha na hoga kabhi,,,
Phir bhi hai ek kasak use apnane ki...
ज़िंदगी कभी फूलों का हार नज़र आती है
तो कभी ये कांटों का ताज़ नज़र आती है
कभी लगती है जैसे संगीत की मधुर लहरी,
तो कभी बिना सुरों का साज़ नज़र आती है
कहीं दिखती है अमीरों के ठाठों में बेसुध,
कहीं कंगाल के चूल्हे की राख नज़र आती है
कभी मज़दूर के पसीने में झलकती है वो,
तो कभी बे- ईमानों के साथ नज़र आती है
कभी हंसती मुस्कराती है अपनों के बीच,
तो कभी यूं ही गैरों के साथ नज़र आती है
ये शीशा ये सपना ये ज़िंदगी की डोर
कब टूट जाएं ये किसको पता है
मोहब्बत के दरिया में ज़फ़ा की कस्ती
कब डूब जाये ये किसको पता है
झूठ की नींव पर बहुत बनते हैं रिश्ते
कब टूट जायें ये किसको पता है
छोटी सी ज़िंदगी में भर दो हर खुशी
कब रूठ जाये ये किसको पता है
दिल में बसा लो अपने बुज़ुर्गों का साया
साथ कब छूट जाये किसको पता है...
ज़िंदगी जीनी है तो, घर से निकल कर देखो
कुछ धूल फांको, कुछ धूप में चल कर देखो
बेजान पत्थर भी तड़पते हैं ज़िंदगी के लिये,
उन्हें अपने दर ओ दीवार में, लगा कर देखो
गुलशन में लगा फूल मुस्कराता है रात दिन,
डाली से टूट कर वो कैसे हंसे, सोच कर देखो
ये ज़रा सी ज़िंदगी सब को जीने का हक़ है,
पर क्यों अज़ाब देते हैं हम, विचार कर देखो
खुद भी जियो औरों को भी जीने दो दोस्तो,
यही #ज़िंदगी का मंत्र है, ज़रा समझ कर देखो
मोहब्बत की हवा दर्द ए दिल की दवा बन जाती है
प्यार गर करीब हो तो ख़िज़ां भी फिज़ां बन जाती है
कोई कैसे भूल सकता है ज़िंदगी के हसीन लम्हों को
पर फक़त यादों के सहारे जीना भी सज़ा बन जाती है...