चलिए मगर, यूं फासले, मत बनाइये
फ़क़त अपने लिए रस्ते, मत बनाइये
हैं और भी मुसाफिर तेरी राहों के यारा
उनसे दुश्मनी के रिश्ते, मत बनाइये
बिना हमसफ़र के न कट सकेंगी राहें
सरपट सी ज़िंदगी में गड्ढे, मत बनाइये
मोहब्बत के सिवा सारे मज़हब हैं झूठे
दिलों को नफरतों के अड्डे, मत बनाइये
जो कुछ भी है पास वो खुदा की नेमत है
झूठी मिल्कियत के सपने, मत सजाइये
भले ही दूर हैं पर अपने तो अपने हैं "मिश्र"
कभी दिलों में उनसे फासले, मत बनाइये
आते हैं आज मंहगे, कल सस्ते भी आएंगे
कभी चल कर तेरे क़रीब, रस्ते भी आएंगे
न हो ग़मज़दा इन पतझड़ों से अय बागवाँ,
बची हैं गर शाखें, तो फिर से पत्ते भी आएंगे
समय का चक्र तो घूमेगा अपने हिसाब से,
आये हैं बुरे दिन, तो कभी अच्छे भी आएंगे
न हो #उदास देख कर वीरानगी गुलशन की,
परिंदे बनाने नीड़ अपना, फिर से भी आएंगे
न छोड़िये विटप की परवरिश का सिलसिला,
आज आये हैं फल खट्टे, कल मीठे भी आएंगे #ज़िन्दगी के इस मेले में आएंगे लोग कैसे कैसे,
गर आएंगे कभी शातिर, तो फ़रिश्ते भी आएंगे
नफ़रत थी दिल में, तो इज़हारे प्यार क्यों कर बैठे, #मोहब्बत के नाम पर, ज़िंदगी निसार क्यों कर बैठे !
जब छोड़ के ही भागना था बीच रस्ते से अय दोस्त,
तो फिर चलने का साथ मेरे, इक़रार क्यों कर बैठे !
जिधर देखो उधर दुश्मन ही तो दुश्मन हैं जहान में,
फिर बेताबियाँ के चलते, खुद पर वार क्यों कर बैठे !
जब पता ही था कि मंज़िलें आसान नहीं हुआ करतीं,
फिर दरम्याने सफर, दिल को बेक़रार क्यों कर बैठे !
चाहतों के मसले पे दिल को संभाल कर रखिये "मिश्र",
अरे आसमां की चाहत में, सितारों से रार क्यों कर बैठे !
Udas Na Baitho #Fiza Tang Karegi,
Guzre Huye Lamhon Ki Saza Tang Karegi...
Kisi Ko Na Layo #Dil Ke Itna Qareeb,
Kyun Ki Uske Jane Ke Baad Uski Ada Tang Karegi !!!