Tera Vaade Pe Aitbaar
गज़ब किया जो तेरे वादे पे एतबार किया,
तमाम रात हमने क़यामत का इंतज़ार किया...
न पूछ #दिल की हक़ीक़त मगर यह कहतें है,
वो बेक़रार रहे जिसने बेक़रार किया...
गज़ब किया जो तेरे वादे पे एतबार किया,
तमाम रात हमने क़यामत का इंतज़ार किया...
न पूछ #दिल की हक़ीक़त मगर यह कहतें है,
वो बेक़रार रहे जिसने बेक़रार किया...
भूलकर हमें अगर तुम रहते हो सलामत,
तो भूल के तुम को संभलना हमें भी आता है...
मेरी फ़ितरत में ये आदत नहीं है वरना,
तेरी तरह बदल जाना मुझे भी आता है !!!
कहीं ज़िंदगी हमारी, बदतर न हो जाए
कहीं ये दिल हमारा, पत्थर न हो जाये
उगाते रहिये फसलें ग़म या ख़ुशी की,
कहीं ये दिल की जमीं, बंजर न हो जाये
न होइए गुम इस गुलशन की फिज़ा में,
यारा कहीं कोई गुल ही, खंज़र न हो जाए
ज़रा सा काबू में रखिये अपने दिल को,
कहीं ज़िन्दगी का ढांचा, जर्जर न हो जाये
इस खामोश हवा से भी ज़रा यारी रखिये ,
कहीं बदल के तासीर, बवण्डर न हो जाए
समेट के रखिये ग़मों के दरिया को ,
कहीं किनारे तोड़ कर, समन्दर न हो जाए...
हमने तो इन हाथों की, हर लकीर मिटा डाली,
अपने ही हाथों से, अपनी तक़दीर मिटा डाली
कभी जलवे हुआ करते थे रंगीन महफ़िलों के,
पर इस वक़्त ने उनकी, हर तस्वीर मिटा डाली
मालूम न था कि आँखों में है ख्वाबों का ज़खीरा,
हमने तो अपनी नींदों की, तासीर मिटा डाली
कभी हम भी पहुँच जाते अपनी मंज़िल पे यारो,
अफसोस कि हमने तो, हर तदबीर मिटा डाली
अब न रहा याद कुछ भी भुला दीं सब कहानियां,
हमने तो खुद के दिल से, हर तहरीर मिटा डाली
अब थक चुके हैं हम तो दर्द सुनाते सुनाते,
हमने तो अपनी जुबां से, हर तक़रीर मिटा डाली
न हिन्दू होते न हम मुसलमान होते
काश हम एक अच्छे से इंसान होते
न आतीं गोलियों की बौछारें कहीं से
न यूं शहीदों के इतने बलिदान होते
न भड़कते नफरतों के शोले दिलों में
न यूं मोहब्बतों के रिश्ते बेजान होते
न होती खड़ी आतंकियों की ये फौजें
न यूं दहशतों से चेहरे हलकान होते
न रहता दुश्मनी का जज़्बा किसी में
न यूं ही दोस्ती के रिश्ते बदनाम होते
न सियासत में होती फरेबों की चाशनी
न "मिश्र" जालों में फंस के हैरान होते