सदा नहीं उड़ सकता पंछी लौट जमीं पर आता है
एक बार में उड़ कर पंछी #मंजिल कभी न पाता है
उड़ो #गगन में रहो धरा पर तुम मंजिल पा जाओगे #जीवन के इस रंग मंच पर अपना नाम कमा जाओगे
जो #जमीन पर रहता है उसका कुछ नुकसान नहीं
गिर कर फिर उठ सकता है इसमें कुछ अपमान नहीं (y)
पैर हों जिनके मिट्टी में, दोनों हाथ कुदाल पर रहते हैं
सर्दी , गर्मी या फिर बारिश, सब कुछ ही वे सहते हैं
आसमान पर नज़र हमेशा, वे आंधी तूफ़ां सब सहते हैं
खेतों में हरियाली आये, दिन और रात लगे रहते हैं
मेहनत कर वे अन्न उगाते, पेट सभी का भरते हैं
वो है मसीहा मेहनत का, उसको किसान हम कहते हैं
रात का अँधेरा तो सुबह होते ही छंट जायेगा
कोहरे का असर भी सूरज के साथ घट जायेगा
क्या करें उस रात का जो दिल में अँधेरा कर गयी
क्या करें उस धुंध का जो मन में बसेरा कर गयी
नहीं उजाला दिल के अंदर तो सूरज भी क्या काम करे
मन में तेरे भरा हलाहल तो अमृत भी क्या काम करे
प्यार का दीप जला कर दिल में घोर अँधेरा दूर करो
प्यार की बात बसा कर मन में घोर हलाहल दूर करो
बातें तो आती जाती हैं उनका मत संकलन करो
गुजर गया सो गुजर गया उसका मत आकलन करो
हर दिन अगर सुहाना है, तो उसकी मंज़िल रात क्यों है
जीत में गर खुशी है, तो खेल में हार की बात क्यों है
पैदा हुए हम जीने के लिये, फिर मरने की बात क्यों है
जब इत्रेमोहब्बत महकता है, तो नफरत की बात क्यों है
जब अपनों की ये दुनिया है, तो बेगानों की बात क्यों है
दोस्ती की कसम खा कर भी, पीछे से घात क्यों है