छोटी सी जिंदगी है,
हर बात में खुश रहो।
जो पास में ना हो,
उनकी आवाज़ में खुश रहो।
कोई रूठा हो तुमसे,
उसके इस अंदाज़ में खुश रहो।
जो लौट के नही आने वाले है,
उन लम्हो की याद में खुश रहो।
कल किसने देखा है,
अपने आज में खुश रहो।
खुशियों का इन्तेजार किसलिए,
दुसरो की #मुस्कान में खुश रहो।
क्यूँ तड़पते हो हर पल किसी के साथ को,
कभी तो अपने आप में खुश रहो।
छोटी सी #जिंदगी है,
हर हाल में खुश रहो...
कभी न कभी तो, ये वक़्त भी आना ही था,
जो आया था उसे तो, एक दिन जाना ही था !
क्यों लगा बैठे थे तुम एक मुसाफिर से दिल,
उसे तो अपनी, #मंज़िल की ओर जाना ही था !
होती नहीं ये दूरियां राहों की असीम यारो,
कभी न कभी तो छोर, उनका आना ही था !
कुछ भी न साथ लेकर गया वो जाने वाला,
उसे सब कुछ तो इधर, छोड़ जाना ही था !
बूढ़े दरख़्तों से आँधियों की भला क्या यारी,
कभी न कभी तो जड़ से, उखड जाना ही था !
क्यों ग़मज़दा हो देख अपने गुलशन को दोस्त,
इसमें कभी न कभी तो, पतझड़ आना ही था !!!
महक #दोस्ती की इश्क़ से कम नहीं होती,,,
इश्क़ से ज़िन्दगी शुरू या खत्म नहीं होती...
अगर साथ हो ज़िन्दगी में अच्छे दोस्तों का,
तो यह ज़िन्दगी भी जन्नत से कम नहीं होती...