खुश है ज़िंदगी से जो, उसे आबाद रहने दो,
दिल की धड़कनें यूं ही, बे-आवाज़ रहने दो !
न उखाड़ो गढ़े मुर्दों को यूं ही बेसबब यारो,
यूं गुज़रे हुए लम्हों को, मत आज़ाद रहने दो !
नहीं है फरिश्ता कोई इस जमाने में अब तो,
संभालो खुद को ही, औरों की बात रहने दो !
न सिखाइये अपनी सरगम किसी को ,
जो खुश है जिस अंदाज़ में, वो अंदाज़ रहने दो !!!
यहाँ कौन है अपना कौन पराया, वक़्त मिला तो देखेंगे,
किसने #दिल से दिल को मिलाया, वक़्त मिला तो देखेंगे !
कितनों ने वफ़ा से साथ निभाया, वक़्त मिला तो देखेंगे,
यहां कितनों से हमने धोखा पाया, वक़्त मिला तो देखेंगे !
जीवन के पथ पर चलते चलते हम हार गए हम टूट गए,
किस रस्ते ने हमको खूब सताया, वक़्त मिला तो देखेंगे !
सहते सहते अपनों की घातें दिल अपना हलकान हुआ,
कब कौन सा किसने तीर चलाया, वक़्त मिला तो देखेंगे !
करता सब के मन की रहा कितना ही भले नुक्सान हुआ,
इस जीवन में किसने ज़हर मिलाया, वक़्त मिला तो देखेंगे !
अपनों से मिल कर खुश होना अपने #नसीब में नहीं,
पर गैरों ने कितना #प्यार लुटाया, वक़्त मिला तो देखेंगे !!!
तुम्हीं पे मरता है ये दिल, अदावत क्यों नहीं करता,,,
कई जन्मों से बंदी है, बगावत क्यों नहीं करता...
कभी तुमसे थी जो, वो ही शिकायत है ज़माने से,
मेरी तारीफ़ करता है, #मोहब्बत क्यों नहीं करता...
न करनी है तुम्हें मदद, तो खुलेआम मत करिये,
मगर किसी की इज़्ज़त का, क़त्लेआम मत करिये !
ये दौलतें ये शौहरतें कभी साथ नहीं जातीं दोस्त,
इस बेकार की चीज पर, इतना गुमान मत करिये !
आता है तुम्हारे दर पे कोई तुम्हें अपना समझ कर,
यारो उसको ज़लील करने का, इंतज़ाम मत करिये !
ख़ुदा भी न कर सका कुछ भी मदद के बिना,
तुम तो बन्दे हो उसके, ज्यादा अभिमान मत करिये !!!
सब कुछ लुटा कर, कुछ मिला तो क्या मिला,
अरे इज़्ज़त गवां कर, कुछ मिला तो क्या मिला !
सारी #ज़िन्दगी तो गुज़ार दी बेचारगी में हमने,
अपनी मौत पा कर, कुछ मिला तो क्या मिला !
शराफत की ज़िन्दगी न जीने दी किसी ने भी,
यारो आँखें दिखा कर, कुछ मिला तो क्या मिला !
देखा है बड़े गौर से ईमान ओ करम अपनों का,
गैरों से रिश्ते जोड़ कर, कुछ मिला तो क्या मिला !!!