गिर के फिर संभलने का, मज़ा ही कुछ और है ,
अपने पैरों से चलने का, मज़ा ही कुछ और है !
प्यार में चोट खाने का अफसोस न करो दोस्त, #मोहब्बत में बिछड़ने का, मज़ा ही कुछ और है !
ज़िन्दगी जीने के लिए कोई तिकड़म न लगाइये,
सिर्फ अपनी तरह जीने का, मज़ा ही कुछ और है !
अपने अमोल रिश्तों को दौलत से न तौलिये कभी,
अपनों के आगे झुकने का, मज़ा ही कुछ और है !
भरी पड़ी है ये दुनिया अनेकों लम्पटों से दोस्त ,
उनसे ईमान बचा रखने का, मज़ा ही कुछ और है !
Jee Chahta Hai Tum Se Pyari Si Baat Ho,
Haseen Chand Tare Ho, Lambi Si Raat Ho...
Fir Raat Bhar Yahi Guftagu Rakhein Hum Dono,
Tum Meri #Zindagi Ho, Tum Meri Kayinat Ho!
कभी क़ातिल रिहा, कभी मासूम लटक जाता है,
फरेबों के सहरा में, बेचारा सच भटक जाता है !
शराफ़त की औकात कुछ भी नहीं जमाने में,
बदमाशियों के आगे, सब कुछ अटक जाता है !
अजीब सा आलम है इस बेसब्र शहर का यारो,
यहां ज़रा सा मसला भी, दिलों में खटक जाता है !
लोग बिछाते हैं जाल कुछ इस कदर फरेबों का,
कि #ज़िन्दगी का सफ़र, अधर में अटक जाता है !
ये दुनिया वो दुनिया नहीं जिसकी तलाश है हमें ,
इसमें घुसते ही प्राणी का, साहस ठिठक जाता है !!!
गर चाहिए मोहब्बत, तो काबिल बनिए,
तपती धूप नहीं, खुशनुमा बादल बनिए !
बन के बारूद क्या मिलेगा तुम्हें दोस्त,
बन सको तो, आँखों का काजल बनिए !
न मुस्कराओ किसी को डूबता देख कर,
गर बन सको तो, उसका साहिल बनिए ! #ज़िन्दगी में ज़रा संभल कर चलिए दोस्त,
न ज्यादा सुर्ख़रू, न ज्यादा जाहिल बनिए !!!!
घर बैठे कभी फूल, मुस्कराने नहीं आते,
बिन ख़ुशी, मोहब्बत के तराने नहीं आते !
नफ़रत को उजड़ा हुआ आशियाँ समझो,
जहां पंछी भी कभी, सर छुपाने नहीं आते !
खुश्क आँखें भी कर देती हैं वयां हाले दिल,
उनको भी दिल के राज़, छिपाने नहीं आते !
क्यों छोड़ा था सफ़र में यूं अकेला उनको,
यारा लौट कर कभी, यार पुराने नहीं आते !
शहर की फ़िज़ाओं से बच कर रहिये दोस्त,
आग लगाने आते हैं लोग, बुझाने नहीं आते !
बेहतर, भूल जाओ गुज़रे लम्हों को दोस्त,
क्योंकि लौट कर फिर, वो जमाने नहीं आते !!!