बच के रहिये उनसे, जो दिलों में विष घोलते हैं
दिलों में नफ़रत, पर बाहर मीठी जुबां बोलते हैं
उनके लिए कोई अपना पराया नहीं है दोस्तों,
बस वो हर किसी को, उसकी दौलत से तौलते हैं
दिखाते हैं कि बस वही हैं रहनुमा दुनिया में,
मगर जब वक़्त पड़ता है, तब वो पत्ते खोलते हैं #ज़िंदगी गुज़र जाती है यही व्यापार करने में,
मिलता है क्या उनको, जो यूं #दिलों को तोड़ते हैं
बेरहम दुनिया में कोई किसी का नहीं,
लोग यहां सिर्फ, मतलब के लिए रिश्ते जोड़ते हैं
भूल जाओ यारो, अपने हाथों की लकीरों को
खुद ही बनाना पड़ता है, अपनी तक़दीरों को
उसका तो फल मिलेगा जो किया है तुमने
मगर दोष देते हो क्यों, अपनी तकदीरों को
ग़मों का क्या वो न छोड़ते हैं किसी को भी,
चाहे जकड़ें गरीबों को, चाहे पकड़ें अमीरों को
ख़ुदा तो बैठा है हर किसी के #दिल में,
मगर सर नवाते है हम, बेज़ुबान तस्वीरों को...
समझने वाले के लिए, ज़रा सा इशारा काफी है
डूबने वाले के लिए, तिनके का सहारा काफी है
दिन तो कट जाता है ज़िंदगी की कश्मकश में,
रात गुज़रने के लिए, यादों का सहारा काफी है
जो डूबने से डरते हैं वो क्यों खेलते हैं सागर से,
उनके लिए तो बस, सागर का किनारा काफी है
जो लिखा है तक़दीर में मिलता वही है,
हमें तो जीने के लिए, ख़ुदा का सहारा काफी है
ये दुनिया वो दुनिया नहीं, जिसकी तलाश में तू है
इधर ईमान नहीं मिलता, जिसकी तलाश में तू है
बिकता है ज़मीर यहां अब कोडियों के दामों में,
तू ज़िन्दगी न जी पायेगा, जिसकी तलाश में तू है
मतलबी हैं लोग यहां नफ़रत का बाजार फैला है,
न मिल सकेगी वो मोहब्बत, जिसकी तलाश में तू है
घुसना पड़ेगा तनहा तुझे इस दुनिया की भीड़ में,
न मिल सकेगा सहारा तुझे, जिसकी तलाश में तू है
रंग जा तू भी अब इस दुनिया के रंग में
वो रंग तो सब अब मिट गए, जिसकी तलाश में तू है
हमें गैरों से नहीं सिर्फ अपनों से डर लगता है
हमें नफ़रत से नहीं #मोहब्बत से डर लगता है
दिल में #चाहत के तूफान बहुत है मगर
उल्फ़त के दुश्मनों से टकराने से डर लगता है