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Pehle si mohabbat na rhi

कोई रो रहा है यहाँ, तो कोई हंस रहा है
कोई किसी पर, विषैले तंज़ कस रहा है
कोई बुन रहा है बैठ कर फरेबों के जाल,
कोई अपने ही जाल में, खुद फंस रहा है
यही है कहानी नगर नगर की दोस्तो, कि
कपट का सांप, हर किसी को डस रहा है
अब न रही पहले सी #मोहब्बत,
हर दिल में, नफ़रत का ज़हर बस रहा है...

Kisko hamdard samjhe

किस को हकीकत कहें, किस को वहम समझें
किस को कमतर कहें, किस को अहम समझें
दिखते हैं दूर से तो सब अपने से लेकिन, इसे
नज़रों का वहम कहें, या ख़ुदा का रहम समझें
एक से एक बढ़ कर हैं शातिर इस दुनिया में,
खुदाया किसको ज्यादा कहें, किसको कम समझें
रिश्तों पे चढ़ा रखा है दिखावे का पानी "मिश्र",
अब किसको हमदर्द कहें, किसको बेरहम समझें

Jeene ki wajah mohabbat

Dukh me #Khushi ki wajah banti hai Mohabbat,
#Dard me yaadon ki wajah banti h Mohabbat...
Jab kuch bhi acha nahi lagta Duniya mein,
To jeene ki wajah banti hai #Mohabbat....

Apne Ehsas Likhta Hu

क्या कहूँ और कैसे कहूँ,
कि मैं क्या #लिखता हूँ..
हर #व़क्त के हर #लम्हें में,
नये #अल्फ़ाज लिखता हूँ...
अल्फ़ाजों में छुपे अपने....
मैं #एहसास लिखता हूँ...
#दिन_रात के बीते #उज़ालों में
मैं हर #बात लिखता हूँ...
हर बात में अपनी मैं,
एक बात लिखता हूँ...
जो #समझ सके हर #बात,
मैं वो बात लिखता हूँ...

Dunia ko naadan mat samjho

ज़रा सी तेज़ हवा को, तूफ़ान मत समझो
वक़्त के मारों को, बे ईमान मत समझो
अपने अंदर भी झांक कर देख लो कुछ,
यूं ही किसी और को, शैतान मत समझो
ज़माना जानता है फितरत हर किसी की,
दुनिया में किसी को, नादान मत समझो
जो सच है उसी को ही पहिचानो दोस्तो,
हर किसी को अपना, भगवान मत समझो
न कर सको भला तो कोई बात नहीं, पर
किसी के लिए करना, अहसान मत समझो