लोगों के अंदर कुछ और, बाहर कुछ और होता है
दिखता है कुछ और, पर असल कुछ और होता है
आप इनके #मासूम चेहरों पर न जाइये साहिबान,
इनके चेहरे पे कुछ और, #दिल में कुछ और होता है
ग़मगीन होकर सुनेंगे तुम्हारे #दर्द की दास्तान ये,
मगर सामने कुछ और, पर पीछे कुछ और होता है
सच तो ये है कि सब निभाते हैं यही किरदार, मगर
अपने लिए कुछ और, गैरों के लिए कुछ और होता है
हर किसी को #मुस्कराने की, आदत नहीं होती,
हर किसी की #चाहत, पाने की नही होती...
रोते है खोकर #तन्हाइयों में #गुमसुम अकेले...
हर किसी को यूँ #अश्क बहाने की आदत नहीं होती...
मस्तिष्क नही जानता कि क्या अहमियत है #रिश्ते की,
क्यूँकि हर किसी को #दिल से सोचने की आदत नही होती...
दुनिया तो #सौगात देती है #आसुओं की ता-उम्र,
दुसरों को #खुश देखने की किसी को #आदत नही होती...
मत लगाओ अपनी कीमत, लोग बेचना शुरू कर देंगे
न गिनाओ कमियां अपनी, लोग खेलना शुरू कर देंगे
दिल खोलो उसी के सामने सो सच मुच तुम्हारा हो,
वरना तो ये फ़रामोश, कब्र में धकेलना शुरू कर देंगे...
टूटे दिलों को, जलाने की कोशिश न करिये
अपना होश, गंवाने की कोशिश न करिये
ज़िन्दगी तो है अपने आप में एक सज़ा,
यूं और दुःख, बढ़ाने की कोशिश न करिये
चल रही है #ज़िन्दगी मर मर के बस यूं ही,
राह में कांटे, बिछाने की कोशिश न करिये
गर अल्फ़ाज़ तीखे हैं तो चुप रहना बेहतर,
सीनों में तीर, चुभाने की कोशिश न करिये
जिनको भूल बैठे थे समय के फेर में "मिश्र",
उन्हें फिर से, भुलाने की कोशिश न करिये...