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Zara sambhal kar rahiye

बा -मुश्किल मिली है आज़ादी, ज़रा संभल के रहिये
पहना दे बेड़िया फिर से न कोई, ज़रा संभल के रहिये
ज़र्रे ज़र्रे में मिला है खून शहीदों का वतन वालो,
ऐसी ज़मीने हिंद को न घूरे कोई, ज़रा संभल के रहिये
खिसका देते हैं पडोसी कुछ नाग हमारे घर में भी
हमें फन उनका भी कुचलना है, ज़रा संभल कर रहिये
डटे हैं जांबाज़ सीमा पर आँखें लगाये दुश्मनों पर
घर के अंदर भी हैं दुश्मन हमारे, ज़रा संभल कर रहिये
लहराता रहे तिरंगा अज़ीमो शान से हर तरफ
उठे न कोई बदनज़र उस पर कभी, ज़रा संभल कर रहिये

Do Pal Ki Khushi Ke Liye

#दिन हो या #रात, हम बस #सफ़र करते है,
#गर्मी हो या #बरसात, हम बस #सफ़र करते है...
नही #जानते कौन #पास है #कौन नही,
हम तो बस हर #पल में सफ़र करते है...
यूँ तो #भेदभाव है ज़ात_पात का बहुत,
भेदभाव #छोड़ हम तो बस सफ़र करते है..
#दोस्तो जीवन के चक्रकाल में करते है मस्कक्ते,
दो #पल की #खुशी पाने को #हम बस #सफ़र करते है...

Shohrat hamesha nhi rehti

ये दबदबा ये हुक़ूमत का मज़ा, हमेशा नहीं रहा करता
ये दौलतों ये शोहरतों का नशा, हमेशा नहीं रहा करता
कोई नहीं जानता ख़ुदा के इशारों को दोस्तो,
यहाँ अंधेरों व उजालों का समां, हमेशा नहीं रहा करता

Mohabbat ke nashe mein

क्या दौर आया है #वक़्त का यारो,
हरेक शख्स पर छाया,  #मोहब्बत का बुखार मिलता है...
करता है बेसब्री से #इन्तजार......
फिर भी #मुलाकात का उसमें #खुमार मिलता है...
नही #जानता कि क्या #अर्थ है, #मोहब्बत के #अल्फ़ाजों का
वो तो #मोहब्बत के #नशे में चूर #सरे_ओ बाजार मिलता है,
करता है मोहब्बत उस #शख़्स से इतनी #बेइम्तहाँ..
फिर भी उसे #बेबफाई का #मोहब्बत में #एहसान मिलता है...
मिलता है #इन्कार जब मोहब्बत में #हमनशी का,
उसे तब #जिन्दगी की #हकीकत का #सार मिलता है...

Dil se dil nahi milata koi

आज आँखों से आँखें, नहीं मिलाता कोई
आज #दिल से भी दिल, नहीं मिलाता कोई
नज़र आता है हर कोई खोया हुआ सा,
अब महफ़िल में जलवे, नहीं दिखाता कोई
भागता फिरता है न जाने क्या पाने को,
अब अपनों में चंद लम्हें, नहीं बिताता कोई
खोजता फिरता है वो जीने के साधन नए,
मगर अपने लिए कुछ भी, नहीं बनाता कोई
ये ख्वाहिशें ये सामान किस के लिए है,
सब कुछ यहीं का है, साथ नहीं ले जाता कोई...