मेरी #मोहब्बत का तुम, कुछ तो हिसाब दे दो !
कब से खड़ा हूँ दर पर, कुछ तो जवाब दे दो !
तुम्हारे सितम का हर हिसाब साथ लाया हूँ,
गर हैं तुम्हारे पास तो, कुछ और अज़ाब दे दो !
पागल था कि #ज़िंदगी भर लुटता रहा मैं यूं ही,
न दे सको गर सारा, मेरा कुछ तो उधार दे दो !
कर दूंगा मैं ज़िन्दगी तुम्हारी नफ़रतों के नाम,
मगर वापस मेरे नाम के, कुछ तो ख्वाब दे दो ! #दिल तो पड़ा है तुम्हारे ही पास गिरवी मेरे दोस्त,
कैसे जाऊं हाथ खाली, मुझे कुछ तो ज़नाब दे दो !!!
नज़दीक रह कर भी, तू जुदा सी लगती है !
हर वक़्त जाने क्यों, तू खफा सी लगती है ! #ज़िन्दगी न आया समझ हमें तेरा फ़लसफ़ा,
कभी हमसफ़र तो कभी, सजा सी लगती है !
हर #लम्हा गुज़ारा है इस कशमकश में हमने,
कि तू वफ़ा की आड़ में, ज़फ़ा सी लगती है !
न जाने कितने रंग देखे हैं इन आँखों ने तेरे,
मगर हर ढंग में हमेशा, तू जुदा सी लगती है !
न समझ पाए हम कि क्या है ज़िन्दगी यारो,
कभी तो दुश्मन तो कभी, ख़ुदा सी लगती है !!!