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Fir Bhi Pyar Karte Hain

अश्क बन कर आँखों से बहते हैं,
बहती आँखों से उनका #दीदार करते हैं,
माना कि #ज़िंदगी मे उन्हे पा नही सकते,
फिर भी हम उनसे बहुत #प्यार करते है  <3

Dunia Mein Sab Lutere

जिधर देखता हूँ उधर, अँधेरा ही अँधेरा है !
न जाने कितनी दूर, मेरी रात का सवेरा है !
बामुश्किल बचा हूँ मैं दुश्मनों के चंगुल से,
मगर अफ़सोस मुझे, अपनों ने आ के घेरा है !
क्या गुल खिलाते हैं लोग देखना है ये आगे,
यहां तो हर तरफ, बस डाकुओं का बसेरा है !
ख़ुशी का कोई कोना न मिलता ढूंढने से अब,
जिधर देखो बस उधर, अब दहसतों का घेरा है !
लड़ रहे हैं लोग सब हड़पने को चीज़े गैरों की,
पर भूलते हैं कि दुनिया में, न मेरा है न तेरा है !
कब तक बचोगे दोस्त जमाने की साजिशों से,
दुनिया में हर शख्स ही, दिखता अब लुटेरा है !!!

Check WhatsApp Again & Again

छोटे बच्चे की चढ्ढी और #WhatsApp
दोनों बराबर है !!!

क्योंकि थोड़ी-थोड़ी देर में
दोनों को चेक करना पड़ता है,
कि कुछ आया तो नहीं। :D :P

Bibi Aur Maa?

वाह रे जमाने तेरी हद हो गई,
बीवी के आगे माँ रद्द हो गई !
बड़ी मेहनत से जिसने पाला,
आज वो मोहताज हो गई !
और कल की छोकरी, तेरी सरताज हो गई !
बीवी हमदर्द और माँ सरदर्द हो गई !
वाह रे जमाने तेरी हद हो गई.!!
पेट पर सुलाने वाली, पैरों में सो रही !
बीवी के लिए लिम्का, माँ पानी को रो रही !
सुनता नहीं कोई, वो आवाज देते सो गई !
वाह रे जमाने तेरी हद हो गई.!!
माँ मॉजती बर्तन, वो सजती संवरती है !
अभी निपटी ना बुढ़िया तू , उस पर बरसती है !
अरे दुनिया को आई मौत,
तेरी कहाँ गुम हो गई !
वाह रे जमाने तेरी हद हो गई .!!
अरे जिसकी कोख में पला, अब
उसकी छाया बुरी लगती,
बैठ होण्डा पे महबूबा, कन्धे पर हाथ जो रखती,
वो यादें अतीत की, वो मोहब्बतें माँ की, सब रद्द हो गई !
वाह रे जमाने तेरी हद हो गई .!!
बेबस हुई माँ अब, दिए टुकड़ो पर पलती है,
अतीत को याद कर, तेरा प्यार पाने को मचलती है !
अरे मुसीबत जिसने उठाई,  वो खुद मुसीबत हो गई !
वाह रे जमाने तेरी हद हो गई .!!!

Bharat Maa Ka Samman

थके हुए राही को मंज़िल की आश चाहिए ,
खो दिया जो हमने वो विश्वास चाहिए,
बर्बाद होते देश को बचाने की खातिर ,
फिर से हमको वो ही सुभाष चाहिए ,
डूबती नैया को बचाले मंझधार से ,
माझी हमें ऐसा पतवार वो ही चाहिए ,
त्याग में पटेल हो ,भगत सिंह ,आज़ाद हो ,
शास्त्री के जैसा ईमानदार चाहिए ,
ला सके जो पानी को खीच के पाताल से ,
अर्जुन का तीर और कमान वो ही चाहिए '
लालच में हो के चूर खो दिया जो हमने ,
वापस माँ भारती का सम्मान चाहिए...