गुज़रेगी चैन से ज़िन्दगी, हम भी मतलब परस्त हो गए,
चमकते थे सितारे बन आँखों में जो, कब के अस्त हो गए
सीख पाये हैं ये हुनर #ज़िन्दगी बिखर जाने के बाद दोस्तो,
जो संभाले थे हौसले जतन से हमने, ख़ुदाया पस्त हो गए !
हमने मगर आदमी की दी नफरतों से, फ़रिश्ते भी त्रस्त हो गए,
कर दी क़ुर्बान ज़िन्दगी की हर ख़ुशी जिनके लिए,
आज वही हम को भुला कर, अपने ख़्वाबों में मस्त हो गए !
पानी को बर्फ में बदलने में वक्त लगता है,
ढले हुए सूरज को निकलने में वक्त लगता है....
थोड़ा धीरज रख, थोड़ा और जोर लगाते रहना,
जंग लगे दरवाजे को खुलने में वक्त लगता है....
कुछ देर रुकने के बाद फिर से चल पड़ना दोस्त,
हर ठोकर के बाद संभलने में वक्त लगता है....
बिखरेगी वही चमक तेरे वजूद से, तू महसूस करना,
टूटे हुए मन को संवरने में थोड़ा वक्त लगता है ....
जो तूने कहा कर दिखायेगा, रख यकीन,
गरजे जब बादल तो बरसने में वक्त लगता है...
खुशी आ रही है और आएगी ही, इन्तजार कर,
जिद्दी दुख-दर्द को टलने में थोड़ा वक्त लगता है..
तुम्हारे चेहरे पे, रंजो ग़म अच्छे नहीं लगते,
हमको गुलों के संग, खार अच्छे नहीं लगते !
तू कहे तो चले जायेंगे तेरी नगरी से मगर,
इतना भर कह दो, कि हम अच्छे नहीं लगते !
जो कहना है सामने बयां कर दो तो अच्छा,
पीठ पीछे तीर चलाने, हमें अच्छे नहीं लगते !
कभी बेचैन रहते थे जो हमारे दीदार के लिए,
अब तो हमारे साये भी, उन्हें अच्छे नहीं लगते !
ये #ज़िन्दगी हमारी है जी लेंगे जैसे भी ,
मगर लोगों के बीच चर्चे, हमें अच्छे नहीं लगते !